कैसे हुई भगवान् राम की मृत्यु , भगवान राम ने लक्ष्मण को मृत्यु दंड क्यों दिया

कैसे हुई भगवान् राम की मृत्यु , भगवान राम ने लक्ष्मण को मृत्यु दंड क्यों दिया 

नमस्कार दोस्तों कैसे है आप आसा करता हूँ की आप सब ठीक होंगे भगवन आप पर हमेसा खुसी बनाए रखे ,
चलिए शुरू  करते है आज का लेख एक और रोचक विषय के साथ ,
तो दोस्तों क्या आप जानते है की कैसे हुई भगवान राम की मृत्यु , जी हाँ दोस्तों क्या आप जानते है की भगवान् राम की मृत्यु कैसे हुई ?
चलिए हम आज आपको बताते हैं ,
कहा जाता है की भगवान् राम इस धरती पर दस हज़ार साल से भी ज्यादा तक रहे , लेकिन अंत में उन्हें भी इस धरती से जाना पड़ा ,
एक दिन की बात है की भगवान राम के दरबार में एक वृद्ध संत भगवान् राम के दरबार में पहुंचे और उनसे अकेले में मिलने के लिए कहा, उस संत की पुकार और विनती मानते हुए भगवान राम उन्हें एक अलग कक्ष में ले गए और द्वार पर अपने छोटे भाई लक्ष्मण को पहरेदार के रूप में खड़ा कर दिया और कहा की यदि उनकी और उस संत की चर्चा को किसी इ भी भंग करने की कोसिस की तो उसे वे खुद मृत्यु दंड देंगे .

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लक्ष्मण ने अपने जेष्ठ भ्राता की आज्ञा का पालन करते हुए दोनों को उस कमरे में एकांत में छोड़ दिया और खुद बहार पहरा देने लगे , वह वृद्ध संत कोई और नहीं बल्कि विष्णु लोक से भेजे गए कालदेव थे जिन्हे प्रभु राम को ये बताने के लिए भेजा गया था की उनका धरती पर जीवन पूरा हो गया है और अब उन्हें अपने धाम वापस लौटना होगा ,
अचनाक द्वार पर ऋषि दुर्वासा आ गए उन्होंने लक्ष्मण से भगवान राम से मिलने के लिए कक्ष के भीतर जाने के लिए निवेदन किया , लेकिन श्री राम की आज्ञा का पालन करते हुवे लक्ष्मण ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया इस पर ऋषि दुर्वासा को क्रोध आ गया जिसके लिए वो  हमेशा से जाने जाते थे  ,
लक्ष्मण के बार बार मना करने पर भी ऋषि दुर्वासा अपनी बात से पीछे न हटे और अंत में लक्ष्मण और श्री राम को श्राप देने की चेतावनी दे दी जिसे देख लक्ष्मण चिंतित  हो गए क्योकि वो समझ नहीं प् रहे थे की अपने भाई श्री राम को श्राप मिलने से बचाए या उनकी आज्ञा का पालन करे ,

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अंत में लक्ष्मण ने फैसला लिया की वो खुद ही अंदर जाएंगे जबकि वो जानते थे की श्री राम के कहे अनुसार उन्हें मरना पड़ेगा इसीलिए वो आगे बड़े और कमरे के भीतर चले गए ,
लक्ष्मण को चर्चा में बढ़ा डालते देख श्री राम भी धरम संकट में पद गए और उन्होंने लक्ष्मण से पूछा की ऐसा क्या काम या क्या बात थी की तुम्हे मेरी आज्ञा तोड़ कर अंदर आना पड़ा , तब लक्ष्मण ने उन्हें सारी बात बताई  तो राम भी दुविधा में पद गए भगवान् श्री राम को दुविधा में देख खुद ऋषि वसिष्ठ  ने उन्हें समझाया की आप लक्ष्मण को मृत्यु के स्थान पर उन्हें देश निकला दे दीजिए , क्योकि देश निकाला भी उसकी मृत्यु के बराबर होता है ,
तब भगवान् राम ने अपने भाई लक्ष्मण को देश निकाला दे दिया , लक्ष्मण आसु बहाते हुवे सीधे सरयू नदी के किनारे जाकर हाथ जोड़कर अपनी सम्पूर्ण इन्द्रियों को वश में करके अपनी सांसे रोक लेते है यह देख सरे देवता उन पर फूलो की वर्षा करते है और देवराज इन्दर उनको उनके शरीर के साथही लेकर स्वर्ग में चले जाते है ,

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लक्ष्मण जी के धरती से चले जाने के बाद भगवान श्री राम ने भी मृत्यु लोक को छोड़ देने का निश्चय कर लिया , भगवान श्री राम का यह निश्चय जान कर सुग्रीव सहित सभी वानर और विभीषण भी अयोध्या  आ गए ,

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इसके बाद भगवान् राम ,भरत सत्रुघन के साथ सभी वानर इस मृत्यु लोक को छोड़कर जाने का निश्चय कर लेते है ,
तब भगवान श्री राम ने जामवंत ,हनुमान  , विभीषण सहित पांच लोगो को मृत्यु लोक छोड़ने से मना कर दिया और सभी वानर और अयोध्या वासियो ने भगवान श्री राम के साथ सरयू नदी में प्रवेश किया और सरयू नदी के जल में विलीन हो गए ,

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तो दोस्तों ये था भगवान श्री राम की मृत्यु का रहस्य जो बहुत से लोग नहीं जानते.
आपको ये जानकारी कैसी लगी हमे जरूर बताए , मिलते है आपसे अगले पोस्ट में ......

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