आखिर परसुराम को अपनी माँ की ऐसी कोनसी बात पता लगी जो उन्होंने अपनी माता का सिर काट दिया था ? परसुराम ने अपनी माता का सिर क्यों काटा?


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आपने अक्सर सुना होगा कि भगवान विष्णु के छठे अवतार माता रेणुका और भृगुवंशीय जमदगनी के पुत्र परशुराम ने अपनी माँ का सिर काट दिया था !लेकिन हम में से कितने लोगों को इसके पीछे का कारण पता है ! शायद बहुत कम लोगों को ही ये रहस्य मालुम होगा ! आइये जानते है कि क्यों काटा भगवान परशुराम ने ही अपनी माता का सिर ! ऋषि जमदगनी और और माता रेणुका के 5 तेजस्वी पुत्र थे ! जिनके नाम थे - रुक्मवान , शुषेणु , वशु , विश्ववसु  और परशुराम ! परशुराम को भगवान शिव से विशेष परशु प्राप्त हुआ था ! इनका नाम तो राम था किन्तु भगवान शिव द्वारा प्रदान किये गए अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये परशुराम कहलाते थे ! भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से छठा अवतार था परशुराम जो वामन एवं रामचंद्र के मध्य मे गिने जाते है ! ऋषि दुर्वासा की भांति परशुराम भी अपने क्रोधी स्वभाव के लिए विख्यात है ! एक बार की बात है परशुराम की माँ माता रेणुका अपने पति जमदग्नि के स्नान के लिए जल लाने के लिए सरोवर पर गयी ! सयोंग की बात , उस समय एक यक्ष सरोवर में कुछ यक्षणियों के साथ जल विहार कर रहा था ! रेणुका सरोवर के तट पर खड़ी होकर यक्ष के जल विहार को देखने लगी वो यह बात भूल गयी कि उसके पति के नहाने का समय हो रहा है और उसे शीघ्र जल लेकर जाना चाहिए ! कुछ देर बाद रेणुका को अपने कर्तव्य का बोध हुआ और वो घड़े में जल लेकर आश्रम में गयी ! घड़े को रखकर देरी के लिए क्षमा मांगने लगी ! जमदग्नि ने अपनी योग दृष्टि से सब जान लिया ! जमदग्नि क्रोध में आ गए ! उन्होंने अपने पुत्रों को आज्ञा दी कि अपनी माता का सिर काटकर धरती पर फ़ेंक दे लेकिन चारों पुत्रों ने इंकार कर दिया !इस पर ऋषि जमदग्नि ने अपने छोटे पुत्र परशुराम को आज्ञा दी कि वो अपने चारों अवज्ञाकारी भाइयों और अपनी माता का सिर काट दे ! परशुराम अपने पिता के अनन्य भक्त थे ! साथ ही उन्हें अपने पिता की यौगिक शक्तियों का भी ज्ञान था वे जानते थे कि यदि उनके पिता उनके आज्ञा पालन से प्रसन्न हो गए तो वे वापिस अपनी माता और भाइयों को जीवित करा देंगे ! इस बात का स्मरण कर परशुराम ने अपनी माता का सिर काट दिया ! इस पर जमदग्नि प्रसन्न हुए और परशुराम से वर मांगने को कहा !
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 परशुराम ने कहा - हे पिताश्री यदि आप मुझ पर प्रसन्न है तो कृपा करके मेरी माता और मेरे भाइयों को पुन्नः जीवित कर दे ! ऋषि जमदग्नि ने अपनी पत्नी और अपने पुत्रों को पुन्नः जीवित कर दिया !  एक बार सहस्त्रबाहु नाम का राजा उस वन में आखेट के लिए गया जहां जमदग्नि ऋषि का आश्रम था ! राजा अपने सैनिकों के साथ उनके आश्रम में उपस्थित हुआ ! ऋषि जमदग्नि ने राजा का और उनके सैनिकों का अपनी कामधेनु गाय की सहायता से राजसी स्वागत किया और उनके खाने-पीने का प्रबंध किया ! कामधेनु का चमत्कार देखकर राजा मोहित हो गया ! उसने जमदग्नि ऋषि से कहा कि - उन्हें वे अपनी गाय दे दे ! ऋषि ने इंकार कर दिया ! उनके इंकार करने पर सहस्त्रबाहु अपने सैनिकों के साथ कामधेनु को बलपूर्वक ले गए ! परशुराम जब आश्रम में आये तो उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने सारी बातें उन्हें बताई ! ये सुनकर परशुराम को क्रोध आ गया और वे अपना परशु लेकर आश्रम से निकल पड़े ! अभी सहस्त्रबाहु राजा मार्ग में ही था कि परशुराम उसके सामने आ गए ! एक ओर हज़ारों सैनिक थे , दूसरी ओर अकेले परशुराम थे ! घनघोर युद्ध होने लगा ! परशुराम ने अकेले ही सारी सेना को मृत्यु के मुख में पहुंचा दिया ! तब सहस्त्रबाहु स्वयं ही युद्ध करने लगा ! वह अपने हज़ारों हाथों से हज़ार बाण एक ही साथ परशुराम पर छोड़ने लगा ! परशुराम उसके समस्त बाणों को दो हाथों से ही नष्ट करने लगे ! अपने बाणों को विफल होता देख सहस्त्रबाहु ने एक बड़ा वृक्ष उखाड़कर परशुराम पर फेंका ! परशुराम ने उस वृक्ष को खंड - खंड तो कर ही दिया साथ ही सहस्त्रबाहु का सिर भी काटकर पृथ्वी पर गिरा दिया ! परशुराम कामधेनु को वापिस लेकर आश्रम आ गए !
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 इससे उनके पिता बहुत प्रसन्न हुए ! लेकिन उन्हें यह जानकर बहुत दुःख हुआ कि परशुराम ने सहस्त्रबाहु का वध कर दिया है ! उन्होंने परशुराम से कहा कि - उन्हें हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए एक वर्ष तक तीर्थों में भर्मण करना चाहिए ! परशुराम तीर्थों में भर्मण के लिए निकल पड़े ! उधर सहस्त्रबाहु के पुत्र बदला लेने का अवसर ढूंढ रहे थे ! एक दिन जब परशुराम और उनके भाई आश्रम में नहीं थे तब सहस्त्रबाहु के पुत्र आश्रम में आ गए ! जमदग्नि ध्यानस्थ बैठे थे ! सहस्त्रबाहु के पुत्रों  ने उनका मस्तक काट डाला ! वे अपने साथ उनका मस्तक भी ले गए ! रेणुका माता विलाप करने लगी ! जब परशुराम आये तो उनकी माता ने सारी बात बता दी ! परशुराम अपना परशु लेकर महिष्मति गए जहां सहस्त्रबाहु का महल था ! उन्होंने  महिष्मति को तो उजाड़ ही दिया साथ ही सहस्त्रबाहु के सारे पुत्रों का वध कर दिया ! उन्होंने अपने पिता का मस्तक लाकर अपनी माँ को दिया ! रेणुका अपने पति के साथ सती हो गयी ! इस घटना के पश्चात परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रियों से विहीन कर दिया ! श्रीराम अवतार में भगवान श्री राम ने जब उनके क्रोध को शांत किया , तब वे पर्वत पर जाकर तप करने लगे ! उनकी शूरता और वीरता ने उन्हें अमर बना दिया !

Comments

  1. Apka from nahi mila pl give me appl tion.from my Email ID. rohinilandge30@gmail.com

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