Poem For life -हम सुधरे तो जग सुधरेगा यह सीधी बात स्वीकारे कौन ?




झाक रहे है इधर उधर सब 

अपने अंदर झाके कौन ?


ढूंढ रहे है दुनिया में कमियां 

अपने मन में ताके कौन ?


दुनिया सुधरे सब चिल्लाते 

खुद को आज सुधारे कौन ?


पर उपदेश कुशल बहुतेरे 

खुद पर आज विचारे कौन ?


सुधरने को मुर्ख सुधरेगा 

पर बिल्ली के घंटी बांधे कौन ?


आज नहीं हम कल कर लेंगे 

वकत की अहमियत जाने कौन ?


ठोकर लगेगी तब सम्भलोगे 

ऐसे रोज संभाले कौन ?


हम सुधरे तो जग सुधरेगा 

यह सीधी बात स्वीकारे कौन ? 

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