What's the worst argument you've heard from a lawyer in court? अदालत में एक वकील से आपने सबसे खराब तर्क क्या सुना है?

 अदालत में एक वकील से आपने सबसे खराब तर्क क्या सुना है?


एक बार सेशन कोर्ट में एक वकील साहब बड़े जोर शोर से एक हत्या के प्रयास यानी 307 इंडियन पीनल कोड के मामले में बहस कर रहे थे। कोर्ट में बहुत भीड़ थी हम भी अपनी बारी के इंतेज़ार में कुर्सी पर बैठे थे। जज साहब भी जरूरी फ़ाइल निपटा रहे थे, तथा बीच-बीच में जज साहब कभी-कभी वकील साहब की बहस भी सुन रहे थे।



अचानक से वो वकील साहब ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे। अदालत में जैसे सन्नाटा छा गया। जज साहब और हम साथी वकीलो ने उनको चुप कराते हुए रोने की वजह पूछी तो वो रोते हुए जज साहब से बोले, मुझे पता है आप मेरे क्लाइंट को उसकी पत्नी की हत्या करने के प्रयास में सज़ा दोंगे, परंतु आप शायद नही जानते कि एक मजबूर बे सहारा आदमी को कैसे हर रोज़ उसकी पत्नी कितना परेशान करती है, आदमी के पास कोई रास्ता ही नही रह जाता, उसको दो में से एक रास्ता चुनना ही पड़ता है, या तो वो खुद मर जाए या पत्नी को मार दे। इसलिए मेरे क्लाइंट ने जो किया वो मेरी समझ में सही किया। और मैं रोया इसलिए क्योंकि इसने तो पत्नी से बदला ले लिया परंतु मै पिछले 30 साल से एक आवाज़ नही निकाल पाया अपनी पत्नी के खिलाफ। इसलिए जज साहब आपसे प्रार्थना करता हूँ मेरे क्लाइंट को रिहा कर दिया जाए।


अब जनाब कोर्ट तो कोर्ट है भावनाये वहाँ चलती नही और वकील साहब भावनाओ में बहकर अपने क्लाइंट को खुद ही दोषी ठहरा चुके थे। हमको भी पता था कि अब उनके क्लाइंट को सज़ा जरूर होगी। और जैसा हमने सोचा था सज़ा हुई भी।



अब उन वकील साहब के क्लाइंट और उससे ज्यादा उनकी पत्नी के जुल्मो की चर्चा अदालत के बाहर वकीलो में होती रहती थी। मगर उनके अपनी परेशानी के सार्वजनिक करने से उनकी मदद को बहुत से वकील आगे आये और कुछ लेडी वकीलो ने हर हफ्ते उनके घर जाकर उनकी पत्नी की खबर लेनी शुरू की तो उनकी पत्नी ने उनको दुखी करना बंद कर दिया।


उनकी गलती से क्लाइंट को तो सज़ा हुई परंतु बाद में उस क्लाइंट की अपील भी हाई कोर्ट में मंजूर हो गई और वो ज़मानत पर छूट गया।


धन्यवाद।



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What's the worst argument you've heard from a lawyer in court?


Once in the sessions court, a lawyer was arguing loudly in the case of an attempt to murder i.e. 307 Indian Penal Code. The court was very crowded, we were also sitting on the chair waiting for our turn. The judge was also disposing of the necessary file, and in between, the judge was sometimes listening to the arguments of the lawyer.


Suddenly the lawyer started crying loudly. There was silence in the court. The judge and we fellow lawyers asked him the reason for crying while pacifying him, then he wept and said to the judge, I know that you will punish my client for trying to kill his wife, but you probably do not know that a compulsion How a helpless man is harassed by his wife every day, the man is left with no way, he has to choose one of the two paths, either he himself dies or kills his wife. So what my client did was right in my opinion. And I cried because it took revenge on the wife but I could not raise a voice against my wife for the last 30 years. So, Judge, I request you to release my client.


Now sir, the court is the court, feelings do not run there and the lawyer sahib had himself blamed his client by getting carried away by the feelings. We also knew that now his client will definitely be punished. And as we thought the punishment was done.


Now the atrocities of the clients of those lawyers and more than that of his wife used to be discussed in the lawyers outside the court. But after making his own problems public, many lawyers came forward to help him and some lady lawyers started going to his house every week to get the news of his wife, then his wife stopped hurting him.


The client was punished due to his mistake, but later that client's appeal was also approved in the High Court and he was released on bail.


Thank you.



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