आज भी मौजूद है पारस पत्थर। कहानी पारस पत्थर की , मिल जाए तो दुनिया खरीद लोगे | Paras stone still exists today. The story of Paras Patthar, if you get it, you will buy the world

 दोस्तों आज इस वीडियो में हम आपको बताएंगे एक ऐसी रहस्य्मयी चीज़ के बारे में की अगर वो आपके हाथ लग जाए तो आप रातो रात दुनिया के सबसे धनि आदमी बन जाएंगे , जो आज सबसे अमीर है कल वो आपको छोटे और बहोत छोटे नजर आएंगे , 

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आप जो चाओ खरीद सकोगे , जी हाँ सही सुना आपने जो चाहो खरीद सकोगे , और इससे भी ज्यादा चौकाने वाली बात होगी की इससे आपके धन में कोई कमी नहीं होगी , 

हम आपको एक ऐसी चीज़ के बारे में बताने जा रहे है जो सिर्फ कुछ रूपये की चीज़ो को करोड़ो और अरबो में बदल सकता है , 

जरा सोचिये अगर आपके पास कोई ऐसी चीज़ हो जो छूते ही लोहे को सोना बना दे , 

जी हाँ सही सुना आपने हम ऐसे पत्थर के बारे में बात कर रहे है जिसका नाम है पारस पत्थर 

ये वो पत्थर है जिसे पूरी दुनिया ढूंढ रही है , 

कहा जाता है की बहुत समय पहले एक घसियारा जंगल में घांस काट रहा था अचानक उसका घास काटने का औजार किसी चीज़ से टकराया और सोने का हो गया ,इसे देख कर वह डर गया और चुप चाप मण्डन लुहार के पास गया और उसे बोलै की मुझे इस औजार के बदले लोहे का औजार दे दीजिए और इसे आप रख लीजिए , नहीं तो राजा मुझे सजा दे सकता है ,और मुझे कारावास में भी दाल सकता , लुहार बहुत चालक था उसने कहा इस बात को किसी को मत बताना और बातो ही बातो में उससे सारी बात पूछी और उस जगह का पता ले लिया , और घसियारे के जाने के बाद वह लुहार उस जगह पर पंहुचा और कुछ देर खोजने के बाद उसने वह पत्थर ढूंढ लिया जिसे आज हम पारस पत्थर कहते है , 

उस लुहार ने उस पत्थर से खूब सोना बनाया और लुहार धीरे धीरे अब मण्डन शाहूकार बन गया ,

मण्डन लुहार की एक बेटी थी जो जवान और शादी के लायक हो गयी थी , मण्डन ने उसकी शादी बुरहानपुर के राजकुमार से तय की और तय समय पर मण्डन की बेटी की शादी राजकुमार से हो गयी और मैदान ने दहेज में अपनी बेटी को पारस पत्थर दे दिया , और उसके बारे में बताया की यह क्या है और कहा की जब जरूरत पड़े तो इसे इस्तेमाल कर लेना , राजकुमार को इस विषय में कुछ पता नहीं था , बारात डोली ले कर चल दी , चलते चलते शाम हो गयी और नर्मदा नदी के किनारे राजकुमार ने बारात के साथ डेरा दाल दिया , 

राजकुमार दहेज न मिलने की वजह से गुस्से में थे , राजकुमार ने पालकी का पर्दा हटाया और बोले कैसे कंजूस साहूकार की बेटी हो जो अपनी बेटी को एक हार तक नहीं दिया ,

तब राजकुमारी ने पत्थर निकला और राजकुमार को दिखते हुए बताया की यह तुम्हारी सब इच्छा पूरी कर देगा , इससे राजकुमार नाराज हुवा और पत्थर देख बोलै इससे में अपना सर फोड़ू या अपने माँ बाप का और इतना कहकर , राजकुमार ने वो पत्थर लिया और उसे जोर से नदी के बीचो बीच फेक दिया और पारस पत्थर वही नर्मदा की गहराइयों में विलीन हो गया , 

इसके बाद मण्डन लुहार की बेटी ने उस पत्थर के बारे में बताया और रोने लगी , अब राजकुमार को भी अपने किये पर बहुत पछतावा हो रहा था , 

उसने तुरंत अपने सारे शेनिक नदी में उतर दिए , पत्थर को खूब ढूंढा गया बार बार ढूंढा गया लेकिन पारस नहीं मिला whg homes ने अपनी पुस्तक में इस बात को बताया है की भारत के नर्मदा के अंदर वह पत्थर आज भी मौजूद है , 

इसका दूसरा तथ्य यह है की जहाँगीर नामा में खुद जहाँगीर ने लिखा है की एक बार जब अकबर ने बुरहान पुर पर आकर्मण किया तो वह नर्मदा नदी से जैसे ही पर हुवे तो उन्होंने देखा की हाथी के पेरो में बंधी लोहे की जंजीर सोने में बदल गयी थी , अकबर ने अपनी पूरी फौज को 

नर्मदा में उतारा और पत्थर की तलाश कराई लेकिन पारस उन्हें भी नहीं मिला , 

ठीक इसी तह दुर्गा पिंडारी नामक योद्धा का लोहे का कवच नर्मदा से गुजरते हुए सोने में बदल गया था उसके बाद दुर्गा पिंडारी  ने भी इस पत्थर को ढूंढ़ने का भरसक प्रयास किया लेकिन वह नहीं मिला। 

The martha and the Pindari war Book के लेखक JG DUFF ने भी अपनी बुक में लिखा की नर्मदा की लहरों में आज भी मौजूद है पारस पत्थर , 

आज भी पारस पत्थर को लेकर कई अलग कहानिया सुनाते है जैसे करोली जिले के तिमनगढ़ के पास एक बड़े सागर की गहराइयों में वह पत्थर आज भी मौजूद है , 

एक अन्य कहानी की माने तो भोपाल से 50 किमी की दुरी पर रायसेन के किले में ये पत्थर आज भी मौजूद है , कहा जाता है की राजा RAISEN को ये पत्थर मिल गया था जिसके लिए कई बार युद्ध हुवे और जब जब राजा को लगा की इस बार वह हार जाएगा तो राजा ने उसे किले के एक तालाब में फेक दिया और युद्ध में राजा की मृत्यु हो गयी , इसके बाद किले को कई अलग अलग राजाओ द्वारा बहुत बार खोजा गया लेकिन वह पत्थर आज तक नहीं मिला और देखते ही देखते वह किलो खण्डार में तब्दील हो गया , 

इस किले को आज भी लोग RAISEN FORT के नाम से जानते है ,



आज भी मौजूद है पारस पत्थर।   कहानी पारस पत्थर की , मिल जाए तो दुनिया खरीद लोगे 



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