Power of true mentorship , सच्चे गुरु की शक्ति


                         












सच्चे गुरु की शक्ति
एक बार एक गुरु के बहुत से शिष्य थे । उन्होंने अपने एक शिष्य को गांव में जाकर भिक्षा मांगने को कहा । वो शिष्य
गांव में भिक्षा मांगने चला गया । उसने गांव में जाकर भिक्षा मांगी पर दुर्भाग्य से उसे किसी घर से भिक्षा नही मिली। अंत में वो एक घर के द्वार पर गया और जाकर भिक्षा मांगने लगा। वो घर गांव के बाहर था। उसमे एक तांत्रिक रहता था। शिष्य को ये सब पता नही था । उसने बार बार भिक्षा मांगी । उसने सोचा कि यदि इस घर से भी भिक्षा नहीं मिली तो गुरुदेव को भूखा रहना पड़ेगा। इसलिए वो जोर जोर से भिक्षा के लिए कहने लगा। इतने में उस तांत्रिक को गुस्सा आ गया और उसने बाहर आकर उस शिष्य को श्राप दिया कि तुमने मेरी पूजा को भंग किया है इसलिए मैं तुम्हे श्राप देता हूं कि तुम कल सूर्य उदय होने से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे। यह सुनकर शिष्य घबरा गया और वापिस अपने आश्रम में आ गया। जब गुरुदेव ने उसे देखा तो पूछा कि बताओ आज भिक्षा में क्या मिला हैं।उसने कहा गुरु जी आज तो भिक्षा में मुझे मेरी मृत्यु मिली है ।उसने गुरुजी को सारी बात बता दी।गुरु जी ने कहा ठीक है।रात का समय हो गया था। शिष्य अपनी मृत्यु के बारे में सोच सोच कर डर रहा था।वो गुरुदेव के पास गया। गुरु देव ने पूछा कि क्या हुआ, शिष्य ने कहा मुझे अपनी मृत्यु के बारे में सोच कर बहुत डर लग रहा है, क्या मैं कल का सूर्य  नही देख पाऊंगा। गुरु ने कहा इसमें डरने की क्या बात है। अगर भाग्य में मृत्यु लिखी है तो क्या डरना। शिष्य ने कहा गुरु जी में सारी रात आपकी सेवा करना चाहता हूं। अगर मृत्यु आपकी सेवा करते हुए आए तो इससे अच्छी क्या बात होगी। गुरु ने कहा ठीक है तुम मेरी चरण दबाओ पर एक बात है चाहे कुछ भी हो जाए पर तुम मेरे चरण दबाते रहना। आज मेरे पैरों में बहुत दर्द हो रहा है। जब तक मैं न कहू तब तक मेरे चरण मत छोड़ना। शिष्य गुरु के चरण दबाने लगा। रात का पहला पहर शुरू हो गया। उस तांत्रिक ने एक राक्षस को आश्रम में भेजा पर राक्षस आश्रम के बाहर ही खड़ा रहा। वो गुरु की शक्ति के कारण अंदर प्रवेश नही कर सका। परेशान होकर राक्षस वापिस चला गया। रात का दूसरा पहर शुरू हो गया था। अब तांत्रिक ने मृत्यु को सुंदर युवती के रूप में भेजा। वो गुरु की कुटिया के बाहर शिष्य को पुकारने लगी। कि बाहर आओ मैं तुमसे मिलना चाहती हूं। शिष्य ने कहा मैं बाहर नहीं आ सकता। गुरु देव ने चरण छोड़ने के लिए मना किया है। युवती वापिस चली गई। दूसरा पहर समाप्त हो चुका था। तांत्रिक को क्रोध आ गया उसने इस बार शिष्य के माता पिता के रूप में मृत्यु को भेजा। वे गुरु की कुटिया के बाहर से अपने पुत्र को पुकारने लगे कि बेटा बाहर आओ हम तुमसे मिलना चाहते है। हम बहुत दूर से तुमसे मिलने आए है। हमें तुम्हारी चिंता है। तुम ठीक हो ना। बाहर आओ हम तुम्हे गले से लगाना चाहते है l
शिष्य ने कहा नही मां मैं बाहर नहीं आ सकता आप ही अंदर आ जाओ। मैं गुरु के चरण नही छोडूंगा। वे भी प्रतीक्षा करके वापिस चले गए। तांत्रिक को क्रोध आ रहा था। इतने में सुबह हो गई। गुरु देव जागे और कहा कि अब बताओ तुम कैसे हो। शिष्य ने कहा गुरु देव आपकी कृपा से  मृत्यु भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकी। देखो नया दिन निकल आया है। शिष्य ने गुरु देव को रात की सारी घटना बताई।  पर गुरु देव तो अंतर्यामी थे। वे पहले से ही सब जानते थे।

भक्तो, ये दुनिया एक मायाजाल है अगर हम गुरु की आज्ञा का पालन करे तो हम इन झूठे सांसारिक मायाजाल में नही फसेंगे।


True Guru's Power
Once a guru had many disciples. He asked one of his disciples to go to the village and ask for alms. that disciple
He went to the village to beg. He went to the village and asked for alms, but unfortunately he did not get alms from any house. In the end he went to the door of a house and started asking for alms. That house was outside the village. A tantrik lived there. The disciple did not know all this. He repeatedly asked for alms. He thought that if even alms are not received from this house, then Gurudev will have to starve. So he started asking loudly for alms. In this, that tantrik got angry and he came out and cursed that disciple that you have disturbed my worship, so I curse you that you will die before sunrise tomorrow. Hearing this, the disciple was terrified and returned to his ashram. When Gurudev saw him, he asked, tell me what have I got in alms today. He said Guruji, today I have got my death in alms. He told the whole thing to Guruji. Guruji said okay. It is night time. was. The disciple was afraid thinking about his death. He went to Gurudev. Gurudev asked what happened, the disciple said I am very scared thinking about my death, will I not be able to see tomorrow's sun. The Guru said what is there to be afraid of. If death is written in the fate, then what is there to be afraid of? The disciple said, Guruji, I want to serve you all night. If death comes while serving you, what better thing is there than that? The guru said okay you press on my feet, but there is one thing, no matter what happens, you keep pressing on my feet. Today my feet are hurting a lot. Don't leave my feet until I tell you. The disciple started pressing the feet of the Guru. The first half of the night had begun. That tantrik sent a demon to the ashram but the demon remained standing outside the ashram. He could not enter inside because of the power of the Guru. Distraught, the demon went back. The second half of the night had begun. Now the tantrik sent death in the form of a beautiful maiden. She started calling the disciple outside the guru's hut. Come out I want to meet you. The disciple said I cannot come out. Gurudev has forbidden to leave the feet. The girl went back. The second quarter was over. The tantrik got angry, this time he sent death in the form of the disciple's parents. He started calling his son from outside the guru's hut that son, come out, we want to meet you. We have come from far away to meet you. We're worried about you. are you fine. Come out we want to hug you
The disciple said no mother, I cannot come out, come inside yourself. I will not leave the feet of the Guru. They also waited and went back. The tantrik was getting angry. By then it was morning. Guru Dev woke up and said now tell how are you. The disciple said, Guru Dev, by your grace even death could not harm me. Look, a new day has come. The disciple told Guru Dev the whole incident of the night. But Guru Dev was Antaryami. They already knew everything.

Devotees, this world is an illusion, if we follow the orders of the Guru, then we will not fall into these false worldly illusions.


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