श्राप जिसके कारण श्री कृष्ण ने नहीं पीया देवकी का दूध | Hindi story | Shri Krishna

 

















यह तो आप सभी जानते हैं कि–  श्री कृष्ण को जन्म देने वाले माता – पिता वसुदेव जी और देवकी है । लेकिन उनका पालन – पोषण गोकुल में माता यशोदा और नंद बाबा के घर में हुआ था । आखिर क्यों ? श्री कृष्ण ने नंद बाबा और माता यशोदा के घर में अपना बचपन व्यतीत किया । देवकी माता के गर्भ से जन्म लेने के पश्चात भी उन्होंने माता देवकी का स्तनपान नहीं किया । उन्होंने माता यशोदा का ही दूध क्यों पिया ।  गोकुल में जाकर मां यशोदा को अपनी बाल लीलाओं से क्यों मोहित किया ।  इसके पीछे माता यशोदा और नंद बाबा के पिछले जन्म के पुण्य का फल हैं ।

        कथा के अनुसार   –       पिछले जन्म में नंदबाबा द्रोण नाम के राजा थे और माता यशोदा उनकी धरा नाम की पत्नी थी । दोनों राजा और रानी विष्णु भगवान के बहुत ही बड़े भक्त थे । दोनों राजा रानी प्रतिदिन विष्णु भगवान के नाम का जाप करते थे । ब्राह्मणों को नित्य भोजन कराते थें । उसके पश्चात् स्वयं भोजन ग्रहण करते थे । परन्तु उनके घर में कोई भी संतान नहीं थी । भगवान का नाम जपते जपते उन्हें इस संसार से इतनी विरक्ति हो गई कि वे दोनों जंगल में जाकर एक झोपड़ी बनाकर रहने लगे । वहीं पर दोनों  भगवान के नाम का जप करते थे । अपने जीवन यापन के लिए द्रोण जंगल से थोड़ी सी लकड़ियां काट कर लाते , उन्हे बाजार में बेचकर जो भी थोड़ा बहुत धन मिलता था । उससे पहले वे ब्राह्मणों को भोजन कराते और बाद में अपने आप भोजन करते थे ।  और फिर विष्णु नारायण के नाम का जप करते थे । उनकी इस कठोर तपस्या के कारण स्वर्ग लोक के देवता भी उनकी प्रशंसा करने लगे और विष्णु भगवान से कहने लगे कि – भगवन ,  धरती पर द्रोण और धरा नाम के पति –  पत्नी आपके बहुत ही बड़े भक्त हैं ।   वें आपकी नित्य प्रतिदिन तपस्या करते हैं ।  आपको उनकी इस तपस्या का फल देना चाहिए ।  विष्णु भगवान ने दोनों पति-पत्नी की परीक्षा लेने के लिए सोचा । विष्णु भगवान ने  एक ब्राह्मण का रूप बनाया और पृथ्वी लोक में आ गए । वे धरा की कुटिया पर आकर भिक्षा मांगने लगे । उस समय द्रोण लकड़ियां काटने वन में गए हुए थे । झोपड़ी में द्रोण की पत्नी केवल धरा थी । धरा बाहर आई और उसने ब्राह्मण देव को प्रणाम किया । ब्राह्मण ने कहा कि – देवी,  हमें बहुत भूख लगी है , हमने कई दिनों से भोजन नहीं किया । इसलिए आप जितना जल्दी संभव हो सके मुझे भोजन कराइए ।  धरा ने उन ब्राह्मण देव का अपनी कुटिया में आतिथ्य सत्कार किया  ।  उन्हें उचित आसन पर बैठाया । धरा अपनी रसोई में जाकर देखती है वहां पर खाने के लिए कुछ भी भोजन की सामग्री नहीं थी । धरा ने आकर ब्राह्मण देव से कहा कि –  हे ब्राह्मण देव ,  आपको थोड़ी देर प्रतीक्षा करनी होगी । मेरे पति जंगल में लकड़ियां काटने गए हैं । वे उन लकड़ियों को बेचकर जैसे ही भोजन की सामग्री लेकर आएंगे । मैं तब शीघ्र ही आपके लिए भोजन बना दूंगी ।  बस आप थोड़ी देर प्रतीक्षा कीजिए । ब्राह्मण देव को बहुत तेज भूख लग रही थी । ब्राह्मण ने कहा कि – मुझसे अब और प्रतीक्षा नहीं होती  । या तो मुझे भोजन करा दो या फिर कह दीजिए कि मैं आपको भोजन नहीं करा सकती । मैं उठ कर चला जाऊंगा और किसी अन्य घर से भोजन ग्रहण कर लूंगा । धरा ने सोचा कि अभी तक मेरी कुटिया से कोई भी भूखा नही गया हैं । यदि ये ब्राह्मण देव यहां से भूखे चले गए तो यह तो बहुत ही बड़ा पाप होगा और मैं पाप की भागीदार बन जाऊंगी । धरा ने कहा –  ठीक है , ब्राह्मण देव आप बैठे रहिए , मैं अभी भोजन की सामग्री लेकर आती हूं । धरा जल्दी – जल्दी गांव में गई । वहां एक सेठ की दुकान थी । वहां जाकर बोली – सेठ जी , मुझे भोजन बनाने की थोडी सी सामग्री दे दीजिए । मेरे पति जैसे ही लकड़ियां बेचकर जो भी धन लायेंगे। उससे मैं आप का उधार चुका दूंगी  ।  सेठ ने उधार देने से मना कर दिया । सेठ बहुत ही लालची था और बहुत ही बुरी नियत का था । धरा बहुत ही सुंदर थी । वह उसके रूप पर मोहित हो गया और कहने लगा कि हे देवी यदि तुम मुझे अपनी सुंदरता दे दो तो मैं तुम्हें भोजन की सामग्री बिना धन के ही दे दूंगा । तुम्हें इस भोजन की सामग्री के लिए धन चुकाने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी । धरा ने कहा – सेठ जी , आप स्पष्ट कहिए । तब सेठ बोला कि – तुम मुझे अपने  दोनों स्तन दे दो और  यह सामग्री ले जाओ । धरा ने कहा –  ठीक है सेठ जी आप भोजन की सामग्री तोलिए । मैं आपको अभी अपने दोनों स्तन देती हूं । सेठ खुश हो गया ।  उधर धरा ने पास में पड़े हुए चाकू से अपने दोनों स्तन काटकर सेठ की तराजू में रख दिए और कहा कि – यह लो सेठ जी , तुमने स्तन मांगे थे  । ये वही स्तन है । अब मुझे भोजन की सामग्री दे दो । मेरे घर पर ब्राह्मण देव भूखे बैठे हैं । धरा ने भोजन की सामग्री ली और दौड़ कर अपनी झोपड़ी में आई  । उसने रसोई में  जाकर जल्दी से भोजन बनाया और ब्राह्मण देव को आदर सहित भोजन परोसा । उसकी छाती से खून की धारा बह रही थी । उसके सारे वस्त्र खून में लथपथ हो चुके थे। उसके वस्त्रों को देखकर ब्राह्मण देव बोले कि देवी , आपके वस्त्र खून में सने हुए हैं । ये कैसे हुआ ?  तब धरा बोली कि हे ब्राह्मण देव – आप पहले भोजन ग्रहण कीजिए । बाद में मैं आपको सारी बात बताऊंगी । तब ब्राह्मण देव ने पहले विनम्रता से भोजन ग्रहण किया । भोजन करने के पश्चात ब्राह्मण देव बोले –  देवी , हम जानना चाहते हैं , आप की यह दशा कैसे हुई । तब देवी धरा ने सारी बात बताई । भगवान उसकी यह बात सुनकर प्रसन्न हो गए और उन्हें साक्षात दर्शन दिए । विष्णु भगवान बोले कि –  धरा , तुमने अपने धर्म को निभाया है । तुमने अपने धर्म को निभाने के लिए अपने स्तनों का त्याग किया है । मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि अगले जन्म में मैं तुम्हारी गोद में खेलूंगा और इन्हीं स्तनों से दूध पान करूंगा । विष्णु भगवान ने धरा की सारी पीड़ा को हर लिया और अंतर्ध्यान हो गए । 

              अगले जन्म में यही धरा और द्रोण यशोदा मैया और नंद बाबा के रूप में जन्मे और श्री कृष्ण ने मां यशोदा के इन्हीं स्तनों से दूध पिया और उन्हें अपनी बाल लीलाओं का आनंद प्रदान किया ।


You all know that the parents who gave birth to Shri Krishna are Vasudev ji and Devaki. But he was brought up in the house of Mother Yashoda and Nand Baba in Gokul. But why ? Shri Krishna spent his childhood in the house of Nand Baba and Mother Yashoda. Even after taking birth from the womb of Mother Devaki, he did not breastfeed Mother Devaki. Why did he drink only the milk of Mother Yashoda? Why did you go to Gokul and fascinate mother Yashoda with her child pastimes? Behind this are the fruits of the merits of the previous births of Mother Yashoda and Nanda Baba.

        According to the legend – in the previous birth Nandbaba was a king named Drona and mother Yashoda was his wife named Dhara. Both the king and queen were great devotees of Lord Vishnu. Both the kings and queens used to chant the name of Lord Vishnu every day. He used to feed Brahmins daily. After that, he himself used to take food. But there was no child in their house. While chanting the name of God, they became so detached from this world that both of them went to the forest and started living in a hut. There both used to chant the name of God. For his living, Drona used to cut some wood from the forest, sell them in the market and earn whatever little money he got. Before that he used to feed the Brahmins and later on his own. And then Vishnu used to chant the name of Narayan. Due to his severe penance, the gods of heaven also started praising him and Vishnu started telling God that – Lord, the husband and wife named Drona and Dhara on earth are your great devotees. He does penance for you every day. You should give the fruits of his penance. Lord Vishnu thought of taking the test of both husband and wife. Lord Vishnu took the form of a Brahmin and came to the earth world. They came to the hut of the land and started asking for alms. At that time Drona was going to the forest to cut wood. Drona's wife was the only house in the hut. The earth came out and bowed down to the Brahmin god. The brahmin said - Goddess, we are very hungry, we have not eaten for many days. So you feed me as soon as possible. Dhara gave hospitality to those Brahmin gods in his hut. He made them sit on the proper seat. Dhara goes to her kitchen and sees that there was nothing to eat. Dhara came and said to the Brahmin Dev that – O Brahmin God, you have to wait for a while. My husband has gone to the forest to cut wood. They will sell those wood as soon as they bring food items. I will cook food for you soon then. You just wait a while. The Brahmin Dev was feeling very hungry. The Brahmin said that - I do not wait any longer. Either give me food or tell me that I cannot feed you. I will get up and go and get food from some other house. Dhara thought that till now no one has gone hungry from my hut. If these brahmin gods go hungry from here then it will be a great sin and I will become a participant in the sin. Dhara said - Alright, brahmin god, keep sitting, I am now bringing food items. The land quickly went to the village. There was a Seth's shop there. Going there and said - Seth ji, give me some food preparation material. Whatever money my husband will bring by selling wood. I will repay your loan with him. Seth refused to lend. Seth was very greedy and had a very bad intention. The land was very beautiful. He was fascinated by her appearance and said that if you give me your beauty, O Goddess, I will give you the food items without money. You will never need to pay money for the ingredients of this meal. Dhara said - Seth ji, you should be clear. Then Seth said - You give me both your breasts and take this material. Dhara said – Alright Seth ji, you weigh the food items. I'll give you both my breasts now. Seth was pleased. On the other hand, Dhara cut both his breasts with a knife lying nearby and placed them in Seth's scales and said – Take this Seth, you had asked for breasts. It's the same breast. Now give me the ingredients of the meal. The Brahmin gods are sitting hungry at my house. Dhara took the food items and came running to her hut. He went to the kitchen and prepared food quickly and served food to the Brahmin god with respect. A stream of blood was flowing from his chest. All his clothes were soaked in blood. Seeing her clothes, the Brahmin Dev said that Goddess, your clothes are soaked in blood. How did this happen ? Then the earth said that O Brahmin god - you should take food first. Later I will tell you everything. Then the Brahmin god first humbly took the food. After having food, the Brahmin Dev said – Goddess, we want to know, how did this condition of you happen. Then Goddess Dhara told the whole thing. The Lord was pleased to hear this and gave him a direct darshan. Lord Vishnu said that – Earth, you have fulfilled your religion. You have sacrificed your breasts to fulfill your religion. I give you a boon that in the next life I will play on your lap and drink milk from these breasts. Lord Vishnu took away all the suffering of the earth and disappeared.

              In the next birth, this land and Drona were born as Yashoda Maiya and Nanda Baba and Shri Krishna took birth in these breasts of Mother Yashoda. He drank milk from him and provided him the joy of his child pastimes.

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