सच्ची विजय क्या। क्या है सच्ची जीत | What is the real victory? what is true victory ?













सच्ची विजय क्या है? संत एकनाथ जी से 


पुराने समय मे एकनाथ नाम के एक महान संत हुआ करते थे। एक दिन वह कहीं जा रहे थे तभी उनकी नजर एक मायूस व्यक्ति पर पड़ी तो वह उसके पास थोड़ी ही दूरी पर जाकर खड़े हो गए। तभी वो व्यक्ति संत एकनाथ जी के पास गया और बोला, नाथ! आपका जीवन कितना मधुर है। आप अपने जीवन से कितना संतुष्ट हैं। लेकिन हमें तो शांति एक क्षण भी प्राप्त नहीं होती। मेरा मन हमेशा बेचैन रहता है । कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।

 

तभी संत एकनाथ जी ने कुछ समय विचार किया और उस व्यक्ति को कहा कि तू तो अब आठ ही दिनों का मेहमान है, अतः पहले की ही भांति अपना जीवन व्यतीत कर। संत की यह बात सुनते ही वह व्यक्ति उदास हो गया। और वापस अपने घर की ओर जाने लगा।

रास्ते में उसने सोचा कि मैंने अपनी जिंदगी में कितने बुरे कर्म किए हैं। मैंने किसी को भी कोई खुशी नहीं दी और सब की निंदा की है । मुझे मेरी गलतियों की ही सजा मिल रही है।  मैं अब अपनी सारी गलतियों का पश्चाताप करूंगा। और जिस जिसका दिल मैंने दुखाया है उन सब से माफी मांग लूंगा। शायद इससे ही मेरे पापों का प्रायश्चित हो जाए। और मरने के बाद मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो। 

घर में वह पत्नी से जाकर बोला, मैंने तुम्हें कई बार बहुत सारा कष्ट दिया है। मुझे क्षमा करो। फिर बच्चों से बोला, बच्चों, मैंने तुम्हें कई बार बेवजह पीटा है, मुझे उसके लिए माफ कर दो। जिन लोगों से उसने दुर्व्यवहार किया था, सबसे माफी मांगी। इस तरह आठ दिन व्यतीत हो गए और आठवें दिन के शाम के समय  वह एकनाथजी के पास दुबारा पहुंचा और बोला, नाथ, मेरी अंतिम घड़ी के लिए कितना समय शेष है? तब संत जी  मुस्कुरा कर बोले कि तेरी अंतिम घड़ी तो परमेश्वर ही बता सकता है, किंतु यह आठ दिन तेरे कैसे व्यतीत हुए? भोग-विलास और आनंद तो किया ही होगा? व्यक्ति बोला कि क्या बताऊं नाथ, मुझे इन आठ दिनों में मृत्यु के अलावा और कोई चीज दिखाई नहीं दे रही थी। इसीलिए मुझे अपने द्वारा किए गए सारे दुष्कर्म स्मरण हो आए और उसके पश्चाताप में ही आठ दिन कैसे बीत गए पता ही नही चला। फिर संत एकनाथ जी ने कहा कि जिस बात को ध्यान में रखकर तूने यह आठ दिन बिताए हैं, हम साधु लोग इसी को सामने रखकर सारे काम किया करते हैं। यह देह क्षणभंगुर है, इसे मिट्टी में मिलना ही है। इसलिए जिंदगी में अच्छे कर्म करो ताकि भविष्य में तुम्हे तुम्हारे अच्छे कर्मों का फल मिले। किसी व्यक्ति या संत का गुलाम बनने की जगह परमेश्वर का गुलाम बनो। सबके साथ समान भाव रखने में ही जीवन की सार्थकता है।

दोस्तों अगर हम अपनी जिंदगी में अच्छे कर्म करेंगे तो हमें उसका फल भी अच्छा ही मिलेगा । अतः हम भी शांति से अपना जीवन जी सकेंगे जैसे कि संत एकनाथ जी ने जिया ।  अपने मन, विचार और व्यवहार पर काबू पाना ही सच्ची विजय हैं।


What is the real victory? what is true victory


What is true victory? from sant eknath ji


In olden times there used to be a great saint named Eknath. One day he was going somewhere, when his eyes fell on a sad person, then he stood at a short distance beside him. Then that person went to Sant Eknath ji and said, Nath! How sweet is your life How satisfied are you with your life? But we do not get peace even for a moment. My mind is always restless. Please guide me.

 

Then Sant Eknath ji thought for some time and told that person that you are a guest for only eight days now, so live your life as before. The person became sad after hearing this talk of the saint. And started going back to his house.

On the way he thought about how many bad deeds I had done in my life. I have not given any happiness to anyone and have condemned everyone. I am getting punished for my mistakes. I will now repent of all my mistakes. And I will apologize to everyone whose heart I have hurt. Maybe this will atone for my sins. And after I die, I get to heaven.

In the house he went to his wife and said, I have given you a lot of trouble many times. I'm sorry Then he said to the children, children, I have beaten you unnecessarily many times, forgive me for that. He apologized to all those whom he had mistreated. Thus eight days passed and in the evening of the eighth day he again reached Eknathji and said, Nath, how much time is left for my last watch? Then the saint smiled and said that only God can tell your last moment, but how did you spend these eight days? Bhog-luxury and pleasure must have been done? The person said that what should I tell Nath, in these eight days I could not see anything other than death. That's why I remembered all the misdeeds I had done and how eight days passed in his repentance I did not even know. Then Sant Eknath ji said that keeping in mind you have spent these eight days, we saints do all the work keeping this in front. This body is fleeting, it has to be found in the soil. So do good deeds in life so that in future you will get the fruits of your good deeds. Instead of becoming a slave to a person or a saint, be a slave to God. The meaning of life is in having equal feelings with everyone.

Friends, if we do good deeds in our life, then we will get good results. So we too will be able to live our life in peace like Sant Eknath ji lived. True victory is the control over your mind, thoughts and behavior.

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