Gyan Ganga | महाभारत मे करोड़ो सेनिको का भोजन कौन बनाता था ?


 

महाभारत के युद्ध में कौरव और पांडवों दोनों ने दक्षिण भारत में स्थित उडुपी के राजा को युद्ध में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था । वे दोनों उडुपी के राजा को अपनी सेना में शामिल होने के लिए मनाने लगे । तब उडुपी के राजा श्री कृष्ण भगवान के पास गए और उनसे कहा कि– मैं इस युद्ध में शामिल होकर अपना योगदान देना चाहता हूं , किंतु मैं यह निश्चित नहीं कर पा रहा हूं कि किस तरफ से युद्ध  करूं । कृपया आप मेरा मार्गदर्शन करें ।  तब श्री कृष्ण भगवान ने कहा कि – यदि तुम इस युद्ध में अपना सहयोग देना चाहते हो , तो तुम बिना लड़े भी इस युद्ध में अपना सहयोग दे सकते हो । करोड़ों सैनिक इस युद्ध में लड़ने के लिए तैयार है , परंतु मुझे उनके भोजन की बहुत ही चिंता है । हे राजन ! आप मेरे कहने से उन करोड़ों सैनिकों के भोजन की व्यवस्था कीजिए । यही आप का इस युद्ध में सबसे बड़ा सहयोग होगा । तब श्री कृष्ण के कहने पर राजा उडुपी करोड़ों सैनिकों के भोजन की व्यवस्था करने को तैयार हो गए । । परंतु उन्हें एक बात समझ नहीं आ रही थी । तब उन्होंने श्री कृष्ण से पूछा कि हे प्रभु युद्ध में तो प्रतिदिन हजारों सैनिक मारे जाएंगे । तो मैं फिर कितने सैनिकों का भोजन प्रतिदिन बनवाया करूंगा ?  मैं चाहता हूं कि भोजन बिल्कुल भी व्यर्थ ना जाए और कोई भूखा भी ना रहे । तब श्री कृष्ण भगवान ने कहा कि तुम मेरे पास रात को मूंगफली लाया करना । और मैं जितनी भी मूंगफली खाऊं , तुम समझना कि उतने ही  1000 गुणा सैनिक अगले दिन युद्ध में मारे जाएंगे । इस प्रकार जब महाभारत का युद्ध शुरू हुआ । तब उडुपी नरेश प्रत्येक रात्रि को भगवान श्री कृष्ण के पास गिनकर मूंगफली रखते थे। श्री कृष्ण भगवान जितनी मूंगफली खाते थे  । उडुपी नरेश समझ जाते थे कि उतने ही हजार गुना सैनिक युद्ध में अगले दिन मारे जायेंगे। जैसे कि – श्री कृष्ण भगवान ने 50 मूंगफली खाई तो उडुपी नरेश समझते थे कि अगले दिन 50000 सैनिक युद्ध में मारे जाएंगे । तब वे उतने ही सैनिकों का खाना कम बनवाने की तैयारी करते थे । महाभारत का युद्ध जब समाप्त हुआ , तो राजा युधिष्ठिर ने उडुपी नरेश की बहुत प्रशंसा की । और कहने लगे कि आपने इतने सारे करोडों सैनिकों के भोजन की व्यवस्था इतनी अच्छी तरीके से की थी । और ना ही आपने भोजन को बिल्कुल व्यर्थ जाने दिया , आपने यह किस प्रकार किया था । तब उडुपी नरेश ने इस रहस्य से पर्दा उठाया और सभी को श्री कृष्ण के इस चमत्कार के बारे में बताया । सब श्री कृष्ण भगवान के प्रताप को जानकर उनके आगे नतमस्तक होकर शीश झुकाने लगे । 

इस प्रकार राजा उडुपी ने युद्ध में भाग लेने वाले करोड़ों सैनिकों के भोजन की व्यवस्था करने का कार्यभार संभाला था ।  आज भी कर्नाटक प्रदेश में स्थित कृष्ण मठ  में यह कथा बहुत ही प्रचलित है और प्रतिदिन सुनाई जाती है । कहते हैं इस कृष्णमठ की स्थापना राजा उडुपी ने की थी ।

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