Hindi story | Hindi stories । हिंदी कहानिया | जैसा बोओगे वैसा काटोगे । ना देर है , ना अंधेर है , सब कर्मों का खेल है । जब तक खुद पर ना बीते दूसरों की समस्या समझ नहीं आती ।

 जैसा बोओगे वैसा काटोगे 

Hindi story | Hindi stories । हिंदी कहानिया | जैसा बोओगे वैसा काटोगे । ना देर है , ना अंधेर है , सब कर्मों का खेल है  । जब तक खुद पर ना बीते दूसरों की समस्या समझ नहीं आती  ।


सासू मां की खांसी की वजह से बहू की नींद डिस्टर्ब हो रही थी । पति को तो कुछ कह नहीं सकती थी , इसलिए बेटे को ही चुटकी काट ली । बेटा रोने लगा तो पति को कहने लगी –  मां जी की खांसी की वजह से मुन्ना बार-बार उठ रहा है । पहले ही ठंड बहुत है , अगर ऐसा बार-बार होता रहा तो इसकी तबीयत खराब हो जाएगी । पति उठकर मां के पास गया और मां को डांटने लगा । लेकिन मां की खांसी कहां रुकने वाली थी , उन्हें तो टी बी था । तो बेटे ने गुस्से में आकर मां का बिस्तर घर के आंगन में लगा दिया । मां के पास ठंड में ओढ़ने के नाम का सिर्फ एक फटा पुराना कंबल ही था । उस दिन ठंड बहुत थी । मां कांपती रही पर खांसी थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी । बहू की नींद फिर  से डिस्टर्ब हो गई । उसने फिर से अपने मुन्ना को चुटकी काट ली। पति फिर से उठा , तो पति से फिर से शिकायत करने लगी । पति बाहर गया और मां का बिस्तर आंगन से बाहर गार्डन में लगा दिया । जहां ठंड और ज्यादा लगने लगी । बेटा अपनी मां को एक आंख देखे बिना ही वहां से वापस कमरे की ओर मुड़ा , तो पत्थर से टकराकर गिर गया । बेटे को गिरता देख कर मां को चिंता हुई और मां कहने लगी –बेटा, तुझे चोट तो नहीं लगी । लेकिन बेटे ने अपनी मां की बात का कोई जवाब नहीं दिया और वहां से वापस अपने कमरे में आ गया । ठंड के कारण मां की खांसी और भी बढ़ती गई , कभी उल्टी होती , तो कभी कभी उसकी सांस रुक जाती और पता नहीं बेचारी कब खांसती खांसती  हमेशा के लिए खामोश हो गई । ठंड के कारण बूढ़ी मां का शरीर पूरी तरह से अकड़ चुका था । सुबह उठकर बहू ने पति और बच्चे को भी नाश्ता करवा दिया और अपने आप भी नाश्ता कर लिया । उसके बाद बाहर जाकर देखा तो बूढ़ी मां इस दुनिया से हमेशा के लिए चली गई थी । लेकिन बेटे और बहू के चेहरे पर तो कोई भी उदासी का भाव नहीं था । बल्कि वे दोनों तो खुश थे कि उन्हें हमेशा हमेशा के लिए बूढ़ी मां की खांसी से छुटकारा मिल गया । समय बीतता गया और उनका बेटा भी जवान हो गया । पत्नी तो अपने बेटे की जवानी में ही मर गई थी । लेकिन उसका पति ही बचा था जो अब वह भी बूढ़ा हो गया था । जब उसे भी खांसी आती , तो उसका बिस्तर भी वही आंगन में होता जहां उसने अपनी मां का बिस्तर लगाया था । एक सुबह वह अपने पोते को गोद में लेकर प्यार कर रहा था । रात को बच्चा बीमार हो गया , तो बहू ने सारा इल्जाम अपने ससुर पर लगा दिया और अपने पति से कहने लगी कि – ससुर ने हम से बदला लेने के लिए हमारे बच्चे को बाहर ठंड में सुला लिया । और जब मैंने अपना बच्चा मांगा तो वे मुझे गालियां देने लगे और कहने लगे कि – तू मेरे पोते को मुझसे दूर कर रही हो , और अब देखो इनकी वजह से हमारा बच्चा बीमार हो गया है । पत्नि झूठे ही मगरमच्छ के आंसू बहाने लगी । बेटे को बहुत ही गुस्सा आया और उसने अपने पिता की चारपाई आंगन से निकाल कर बाहर गार्डन में लगा दी । और अपने बाप को घसीटता हुआ वहां तक लेकर गया । बेटे की इसी तरह की रुसवाई को देख कर वह बूढ़ा बहुत रोया । फिर उसे अचानक याद आया कि उसने भी अपनी मां के साथ यही सब किया था । उसे यह भी याद आया कि जब वह अपनी मां की चारपाई को गार्डन में डाल कर जा रहा था , तो वह पर पत्थर से टकराकर गिर गया था । तब उसकी मां ने कहा था कि – बेटा , तुझे कहीं चोट तो नहीं लगी । वह बुड्ढा रात भर अपनी गलतियों को सोच सोच कर बहुत रोता रहा और अपनी मां को बार-बार याद करता रहा । वह सुबह उठकर हमेशा के लिए वृद्धा आश्रम चला गया और सोचने लगा कि – कहीं मैं अभी अपनी मां की तरह ठंड में ठिठुर ठिठुर कर मर गया तो कहीं मेरे बेटे के साथ भी वही ना हो जो मेरे साथ हुआ । मैं अपने बेटे से दूर रहूंगा और अपने पोते के प्यार से वंचित रह लूंगा । क्योंकि मैंने भी अपनी मां को अपने प्रेम आदर और सम्मान से वंचित रखा था और मैं इसी लायक हूं । यही मेरी सजा है।

       ★अपनी जिंदगी में हम जैसा भी करते हैं अच्छा या बुरा । वह घूम फिर कर वापस हमारे पास ही आता है , इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए । ★


ना देर है , ना अंधेर है , सब कर्मों का खेल है  ।

एक गांव में पति और पत्नी रहते थे । उनकी कोई भी संतान नहीं थी । उनकी शादी को 20 साल बीत गए थे । इन बीते वर्षों में जिस किसी ने भी उन्हें कोई भी व्रत या अनुष्ठान बताया , उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए वह सब किया । लेकिन उनकी कोई भी संतान नहीं हुई । तब अगले साल उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई । लेकिन दुर्भाग्य से उस पुत्र की मौत 20 दिन में ही हो गई । उन्होंने कई सालों तक अपने संतान प्राप्ति के लिए बहुत ही अनुष्ठान किए थे और अब 20 दिन में उसकी मृत्यु हो गई । उन्हें बहुत ही दुख हुआ । तब उसकी पत्नी ने अपने उस मृत बच्चे को गोद में उठाया । गांव के बाहर एक सिद्ध महात्मा रहते थे । वो उनके पास आई और उनसे कहने लगी कि – हे साधु महाराज कृपा करके मेरे बच्चे को बस एक बार जीवित कर दीजिए । मैं इसके मुंह से मां शब्द सुनना चाहती हूं । तब साधु महाराज जी उस स्त्री से बोले कि – संसार के रिश्ते नाते सब झूठे होते हैं । इस बच्चे की जिंदगी बस 20 दिन की ही थी । तुम्हें इस दुख से बाहर निकलना चाहिए , परन्तु वह स्त्री नहीं मानी । महात्मा जी ने उसे बहुत समझाया । लेकिन उस स्त्री के बहुत ही जिद करने पर साधु महाराज ने कुछ समय के लिए उस मृत बच्चे की आत्मा को धरती पर बुलाया । और जब वह आत्मा धरती पर आई तो उस स्त्री ने पूछा कि – तुम मुझे छोड़कर क्यों चले गए थे ? मैं तुम्हारी मां हूं  मैं तुम्हारे मुंह से एक बार मां शब्द सुनना चाहती हूं । तब वह आत्मा बोली कि कौन मां , किसकी मां , मेरी कोई मां नहीं है । मेरा किसी से कोई रिश्ता नहीं है । मेरा तो सिर्फ एक ईश्वर से ही रिश्ता है । मैं तो पिछले जन्म का हिसाब लेने के लिए तुम्हारे गर्भ से उत्पन्न हुआ था । तो वो स्त्री बोली – हिसाब ,  कैसा हिसाब । तब वह आत्मा बोली कि – पिछले जन्म में तुम मेरी सौतेली मां थी और तुमने मुझे बहुत ही दुख और तकलीफ दी थी । जिंदगी भर मैं मां के प्यार के लिए तरस रहा था और रो रहा था और आज तुम मेरे लिए रो रही हो 

 कि मैं तुम्हें मां कह कर पुकारू   । बस यही वह कर्मों का हिसाब था जो मैं तुमसे लेने आया था ।  इतना कहते ही वह आत्मा वहां से चली गई । उस स्त्री को यह सब सुनकर बहुत ही झटका लगा और कुछ क्षण के लिए वह मूर्छित हो गई ।  जब उसे होश आया तो महात्मा ने उसे समझाया कि –  मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि इस संसार के सारे रिश्ते नाते हमारे कर्मों के कारण ही जुड़े हुए हैं । कोई भी हमारा अपना नहीं है । हम इस धरती पर अपने कर्मों का फल भोगने ही आते हैं । इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्म  करने चाहिए ताकि हमें कभी पछताना न पड़े ।


जब तक खुद पर ना बीते दूसरों की समस्या समझ नहीं आती  । 

एक चूहा एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था । एक दिन उस चूहे ने देखा कि कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं । चूहे ने सोचा कि कुछ खाने का सामान होगा , पर बाद में देखा कि वह एक चूहेदानी थी । खतरा भांप जाने पर चूहे ने जाकर यह बात एक कबूतर को बताई कि घर में चूहेदानी आ गई है । कबूतर ने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा कि –  मुझे क्या मुझे कौनसा उस में फंसना है । बेचारा निराश होकर चूहा यह बात मुर्गे को बताने गया । मुर्गे ने भी खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि – जा भाई , यह मेरी समस्या नहीं है । हताश चूहे ने बाड़े में जा कर यह बात बकरे को बताई , तो बकरा हंसते हंसते  लोटपोट हो गया । उसी रात चूहे दानी में खटाक की आवाज आई । जिसमें एक जहरीला सांप फस गया था । अंधेरे में उसकी पूंछ को चूहा समझ कर कसाई की पत्नी ने उसे निकाला , तो सांप ने उसे डस लिया । तभी कसाई ने एक हकीम को बुलवाया । हकीम ने उसे कबूतर का सूप पिलाने की सलाह दी । वही कबूतर अब पतीले में उबल रहा था । खबर सुनकर कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुंचे । जिन के भोजन के प्रबंध हेतु अगले दिन उसी मुर्गे को काटा गया । कुछ दिनों बाद उस कसाई की पत्नी सही हो गई , तो खुशी में आकर कसाई ने अपने शुभचिंतकों के लिए एक दावत रखी । तो दावत में उसी बकरे को काटा गया । चूहा अब दूर जा चुका था .....    बहुत दूर । 

        ★ अगली बार कोई आपको अपनी समस्या बताएं और आपको लगे कि यह मेरी समस्या नहीं है तो रुके और दोबारा सोचिए कि कहीं ये आगे चलकर आपकी समस्या  तो नहीं बन सकती , इसलिए उसे सुलझाने का प्रयास कीजिए ★

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