क्या आप जानते है कर्ण और अर्जुन से भी बढ़कर था महाभारत का ये योद्धा ? अगर श्री कृष्ण ना बचाते तो युद्ध से पहले ही अर्जुन को मार चूका होता ये योद्धा जिसके बारे में आप नहीं जानते ?

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महाभारत युद्ध की अनगिनत कहानियों और पराक्रमी पात्रों में कुछ ऐसे पात्र भी हैं जिन्हे पूर्णतः भुला दिया गया हैं ! उनका उल्लेख महाभारत की कहानियों में कहीं नहीं मिलता ! क्योंकि अधिकांश कहानियों में केवल महान और प्रसिद्ध चरित्रों का ही वर्णन है ! ऐसे ही अनसुने चरित्रों में एक नाम है भगदत्त का ! जो प्राग ज्योतिषपुर के राजा नरकासुर का पुत्र था ! भगदत्त का उल्लेख महाभारत में मिलता है ! भगदत्त मात्र एक ऐसा चरित्र था जिसने 8 दिन तक अकेले अर्जुन के साथ युद्ध किया ! युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के समय जब अर्जुन राज्यों को अपने अधीन कर रहे थे तब अर्जुन और भगदत्त का 8 दिन तक युद्ध चला ! अर्जुन ने अनेक प्रयास किये परन्तु प्राग्ज्योतिषपुर पर विजय प्राप्त नहीं कर सके ! भगदत्त और अर्जुन के पिता इंद्र देव आपस में घनिष्ठ मित्र थे ! इसलिए भगदत्त ने उन्हें यज्ञ के लिए शुभकामनाये दी  ! एक बार भगदत्त का युद्ध कर्ण के साथ भी हुआ था जिसमे कर्ण की विजय हुई क्योंकि कर्ण ने भगदत्त को पराजित किया था ! इसलिए भगदत्त ने महाभारत का युद्ध कौरवों की ओर से लड़ा था ! कर्ण ने सभी दिशाओं में राजाओं को अपने अधीन कर लिया था ! इसका उल्लेख महाभारत के उद्योगपर्व  के 164 वे अध्याय में मिलता है ! महाभारत के समय भगदत्त की आयु बहुत अधिक थी और इस योध्या ने भीम , अभिमन्यु और सार्तिके जैसे योद्धाओं को पराजित किया था ! द्रोण पर्व के 24 वे अध्याय में वर्णन मिलता है कि अभिमन्यु और अन्य अनेक योद्धाओं ने एक साथ भगदत्त पर आक्रमण कर दिया था परन्तु भगदत्त के सामने सबने घुटने टेक दिए ! द्रोण पर्व के 27 वे अध्याय में उल्लेखनीय है कि कुरुक्षेत्र युद्ध के 12  वे  दिन भगदत्त का सामना अर्जुन के साथ हुआ ! दोनों के मध्य भयंकर संग्राम हुआ ! एक समय तो ऐसा आया जब भगदत्त ने अपने हाथी से अर्जुन को लगभग कुचल ही दिया था परन्तु भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को बचा लिया ! इसके पश्चात पुनः भगदत्त  के सामने आने पर अर्जुन ने भगदत्त के अनेक अस्त्रों को विफल कर दिया ! तब भगदत्त ने वैष्णो अस्त्र चलाया जिसे काटना अर्जुन के लिए असम्भव था ! जब तक वैष्णो अस्त्र अर्जुन को आकर लगता तब तक भगवान कृष्ण बीच में गए !

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  और उनके सामने अस्त्र वैजन्ती माला में परिवर्तित हो गया और इस तरह भगवान श्री कृष्ण के द्वारा पुनः भगदत्त से अर्जुन के प्राणों की रक्षा हुई ! तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि अब वो भगदत्त पर प्रहार कर उसका अंत करे ! इसके पश्चात सबसे पहले अर्जुन ने भगदत्त के सुप्रतीक नामक पराक्रमी हाथी पर प्रहार किया ! यह प्रहार इतना तीव्र था कि बाण हाथी के कुम्भ स्थल में पंख समेत प्रवेश कर गया ! तब गजराज ने तुरंत ही धरती पर अपने दांत टेक दिए ! इसके पश्चात भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि भगदत्त की आयु इतनी अधिक है कि झुर्रियों के कारण उसकी पलकें झुकी रहती है और उसके नेत्र बंद रहते है क्योंकि भगदत्त बहुत पराक्रमी और शूरवीर है इसलिए उसने अपने नेत्रों को खुला रखने के लिए अपने मस्तक पर पट्टी बांधी हुई है ! यह सुनकर अर्जुन ने सबसे पहले भगदत्त के मस्तक पर बंधी इस पट्टी पर तीर मारा ! जिसके परिणाम स्वरूप वो पट्टी क्षीण हो गयी और उसके नेत्र बंद हो गए ! भगदत्त की आँखों के सामने अँधेरा छा गया और अवसर पाकर अर्जुन ने भगदत्त का वध कर दिया ! वास्तव में भगदत्त चाहे कितना भी पराक्रमी था परन्तु उसके लिए अर्जुन को पराजित करना असम्भव था क्योंकि अर्जुन के पक्ष में स्वयं भगवान कृष्ण थे !



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