क्या महाभारत के इन महान योद्धाओ की प्रेम कहानियों के बारे में जानते है आप ?? महाभारत की कुछ अनसुनी प्रेम कहानिया ,

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हमने महाभारत की कई कथाएं पढ़ी और सुनी है ! इन कथाओं में हमे कई प्रेम कहानिया भी मिलती है ! जिनमे से कुछ तो प्रसिद्ध है और सब उनके बारें में जानते है परन्तु कुछ ऐसी भी प्रेम कहानियाँ भी है जिनके बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते ! आज हम आपको  ऐसी ही प्रेम कहानियों के बारे में बताने जा रहे है  !
 रुक्मणि और श्री कृष्ण  -  हमने हमेशा से ही राधा और श्री कृष्ण की प्रेम कहानियाँ सुनी है परन्तु कहते है कि श्री कृष्ण ने रुक्मणि का अपहरण करके उनसे विवाह किया था ! हालाँकि रुक्मणि भी श्री कृष्ण से बहुत प्रेम करती थी !
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गांधारी और घृतराष्ट्र -  गांधारी को विवाह से पहले इस बात का पता नहीं था कि उनके पति घृतराष्ट्र दृष्टिहीन है ! परन्तु जैसे ही उन्हें अपने पति के दृष्टिहीन होने का पता चला तो उन्होंने स्वंय ही अपने पति जैसी जिंदगी बिताने के लिए अपनी आँखों पर पट्टी बांध ली ! आँखे होते हुए भी गांधारी ने जिंदगी भर अपने आपको दृष्टिहीन रखा !
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अर्जुन और उलूपी  - हम सब जानते है कि अर्जुन का विवाह द्रोपदी के साथ हुआ था परन्तु उलूपी नागराजकुमारी थी  ! उसका दिल अर्जुन पर आ गया ! उन्होंने अर्जुन का अपहरण कर उनसे विवाह कर लिया था ! परन्तु जब उन्हें पता चला कि अर्जुन पहले से ही शादीशुदा है तो उन्होंने अर्जुन को जाने दिया ! साथ ही में एक वरदान दिया कि उन्हें पानी में कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा  !
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हिडिम्बा और भीम  - कुंती पुत्र भीम के प्रेम में हिडिम्बा डूब चुकी थी और इस प्रेम ने हिडिम्बा को बदल डाला क्योंकि हिडिम्बा पहले नरभक्षी थी !  जैसे ही दोनों का विवाह हुआ कुछ ही महीनों साथ रहने के बाद भीम ने उन्हें छोड़ दिया ! हिडिम्बा को एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम घटोत्कच्च था ! हिडिम्बा ने उस पुत्र का बिना किसी पश्चाताप के अकेले ही पालन - पोषण किया ! और बाद में यही भीम का पुत्र महाभारत की लड़ाई में अपने काका श्री अर्जुन के जान बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ !
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सत्यवती और ऋषि पराशर - ऋषि पराशर मशहूर होने के साथ - साथ योगी शक्तियों के मालिक भी थे ! उन्हें एक मछुआरे की पुत्री सत्यवती से प्रेम हो गया ! सत्यवती लोगों को यमुना पार करवाती थी ! जब वह एक दिन ऋषि पराशर को यमुना पार करवा रही थी तो ऋषि पराशर ने सत्यवती से कहा कि - उन दोनों की रचना अनैतिक संबंध से संतान पैदा करने के लिए ही की गयी है ! तभी सत्यवती ने ऋषि पराशर के आगे 3 शर्तें रखी !  पहली शर्त के अनुसार दोनों को शारीरिक संबंध बनाते हुए कोई ना देखे ! इसके लिए ऋषि पराशर ने अपनी शक्तियों से एक कृत्रिम आवरण बना दिया ! सत्यवती की दूसरी शर्त यह थी कि - उसके कुँआरेपन पर कोई दाग ना लगे ! इसके लिए ऋषि ने उन्हें वरदान दिया कि जैसे ही बच्चे का जन्म होगा उनका शरीर दुबारा से कुँआरेपन जैसा हो जायेगा ! तीसरी शर्त के अनुसार सत्यवती ने कहा कि उनसे जो मछली की बदबू आती है वह सुगंधित हो जाय ! ऋषि पराशर ने चारों तरफ ऐसा सुगंधित वातावरण बना दिया कि 9 मील से ही उसकी सुगंधित खुशबु आने लगती थी !  9 महीने बाद सत्यवती के गर्भ से वेदव्यास जी ने जन्म लिया !

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अर्जुन और सुभद्रा -  सुभद्रा के भाई गदा और अर्जुन दोनों ने द्रोणाचार्य के पास एक साथ ही शिक्षा ली थी ! जब अर्जुन द्वारिका में अपने मित्र श्री कृष्ण से मिलने गए तो उन्हें सुभद्रा ने अपने महल में मिलने बुला लिया और वे अर्जुन से प्रेम करने लगी ! श्री कृष्ण ने अपनी बहन सुभद्रा को अर्जुन का अपहरण कर विवाह करने के लिए कहा  ! सुभद्रा ने ऐसा ही किया ! जब अर्जुन सुभद्रा को विवाह के पश्चात द्रौपदी के पास लेकर गए तब सुभद्रा ने तुरंत द्रोपदी को अपने विवाह के बारे में कुछ नहीं बताया ! परन्तु जब वह उससे घुलमिल गयी तब उन्होंने अर्जुन और अपने विवाह के बारे में द्रोपदी को बताया और द्रोपदी ने उसे स्वीकार भी कर लिया !

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सत्यवती और शान्तनु -  ऋषि पराशर के वरदान से सत्यवती के पास से मछली की नहीं बल्कि एक सुगंधित खुशबू आती थी जो की 9 मील दूर से ही पता लग जाती थी ! शान्तनु को इस खुशबु ने बेहद आकृषित कर लिया ! उन्होंने इस खुशबु का जब पीछा किया तो उन्होंने सत्यवती को नौका में पाया ! उन्होंने सत्यवती से कहा कि वह उनको नदी पार करा दे ! जब वे नदी पार कर गए तो उन्होंने सत्यवती से दुबारा विनती की कि वे नदी के दूसरे पार जाना चाहते है ! इस तरह करते-करते 3 - 4  दिन बीत गए और उन्हें सत्यवती से प्रेम हो गया ! बाद में उन्होंने सत्यवती से विवाह कर लिया !



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