जो होता है अच्छे के लिए होता है , whatever happens happens for good

























 


एक बार नारद ऋषि पृथ्वी का भ्रमण कर रहे थे ।तब उन्होंने देखा कि पृथ्वी पर ज्यादातर प्राणी जो धर्मात्मा पुरुष है, संत है ,दूसरों की भलाई करते हैं । वह ज्यादातर दुखी रहते हैं । यह सब देख कर उनका मन बेचैन हो उठा । और वे अपनी शंका के समाधान के लिए वैकुंठ लोक में विष्णु जी के पास गए । वहां पर जाकर उन्होंने श्री विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी जी को प्रणाम किया । नारद को देखकर विष्णु भगवान ने कहा – आओ नारद ।  क्या बात है तुम बहुत ही चिंतित दिखाई देते हो ।तुम्हारी चिंता का क्या कारण है ? नारद ऋषि बोले, भगवन ! मैं अभी पृथ्वी का भ्रमण करके आ रहा हूं ।मैंने देखा है कि ज्यादातर प्राणी जो आपका सिमरन करते हैं ,जो सच्चाई की राह पर चलते हैं ,उन्हें हमेशा दुख ही क्यों मिलता है ? इस पर विष्णु भगवान जी मुस्कुराए और नारद ऋषि से कहा कि चलो नारद ,आज मैं भी तुम्हारे साथ पृथ्वी का भ्रमण करता हूं । तब विष्णु भगवान और नारद जी ने ब्राह्मणों का रूप बनाया और पृथ्वी पर आ गए । विष्णु भगवान बोले कि नारद मुझे बहुत भूख लग रही है , चलो कहीं चल कर भोजन करते हैं । तब वे एक गांव में गए । वहां पर एक सेठ जी का घर था । सेठ जी बहुत ही धनवान थे । विष्णु भगवान और नारद जी सेठ जी के घर के द्वार पर पहुंचकर भोजन के लिए भिक्षा मांगने लगे। सेठ जी बाहर आए उन्होंने देखा कि उनके द्वार पर दो ब्राह्मण लोग खड़े हैं । सेठ जी को आता देखकर नारद जी बोले कि हे  सेठ जी हमने 2 दिन से कुछ नहीं खाया  । बहुत जोर से भूख लग रही है । कृपा करके हमें भोजन करा दे ।सेठ जी ने गुस्से में आकर कहा कि यहां पर तुम जैसे लोगों के लिए कोई भोजन नहीं है । पता नहीं कहां-कहां से आ जाते हैं ?जैसे कि यहां पर कोई खजाना रखा हो । सेठ जी ने उन दोनों ब्राह्मणों को वहां से भगा दिया । नारद जी को बहुत ही क्रोध आ गया । उन्होंने विष्णु भगवान से कहा कि हे भगवन ,आप इस सेठ को श्राप दे दीजिए । यह सेठ बहुत ही क्रोधी स्वभाव का है और कंजूस भी है । तब विष्णु भगवान जी मुस्कुराए और जैसे ही पीछे मुड़कर विष्णु भगवान ने सेठ जी को देखा । तो विष्णु भगवान के मुख से निकला कि जाओ सेठ जी तुम्हारे घर में लक्ष्मी की खूब वृद्धि हो । यह सुनकर नारदजी आश्चर्य में पड़ गए और कहा कि हे  भगवन, इसे तो आपको श्राप देना था और आपने इसे लक्ष्मी वृद्धि का वरदान दे दिया । विष्णु भगवान मुस्कुराए और कहा कि चलो नारद यहां से चलो , भोजन के लिए कहीं और चलते हैं । मुझे बहुत जोर से भूख लग रही है । तब दोनों ब्राह्मण चलते चलते एक कुटिया के समीप पहुंचे । उस कुटिया में एक बुढ़िया मां रहती थी । तब उन दोनों ब्राह्मणों ने कुटिया के बाहर जाकर भोजन के लिए भिक्षा मांगी । तब बुढ़िया मां बोली कि– मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है , परंतु मेरे पास एक बूढ़ी गाय है ।  यह थोड़ा सा जो भी दूध देती है उसे मैं आप लोगों को पिला दूंगी ।आप कृपया करके पधारिए । बुढ़िया ने दोनों ब्राह्मणों को बैठने के लिए आसन दिए । तब बुढ़िया मां गाय का दूध निकाल कर लाई और थोड़ा थोड़ा दूध विष्णु भगवान जी और नारद जी को दे दिया । दोनों ने दूध पीकर अपनी भूख को शांत किया । तब दोनों ब्राह्मण वहां से चल दिए । नारद जी बहुत खुश हो रहे थे । उन्होंने विष्णु भगवान से कहा कि हे भगवन ,यह बुढ़िया मां तो बहुत ही अच्छी है । इन्होंने अपने घर में भोजन ना होते हुए भी हमें अपनी गाय का दूध पिलाया है । आप कृपा करके इसे कोई वरदान दीजिए ।तब विष्णु भगवान जी ने जैसे ही पीछे मुड़कर  बुढ़िया मां की ओर देखा तो विष्णु भगवान के मुख से निकला कि जाओ  मां तुम्हारी यह गाय मर जाए ।  विष्णु जी के मुख से यह वचन सुनते ही नारद जी आश्चर्य में पड़ गए और बोले कि हे भगवन ,जहां आप को श्राप देना था वहां तो आपने वरदान दे दिया और जहां आपको वरदान देना था वहां आपने श्राप दे दिया ।तब विष्णु भगवान मुस्कुराए और बोले कि नारद यह बुढ़िया मां मेरी बहुत ही बड़ी भक्त है । मैं नहीं चाहता इसे किसी तरह का दुख हो। नारद जी बोले परंतु भगवन, जब इसकी गाय मर जाएगी तो इसे बहुत दुख होगा और आप कह रहे हैं कि आप इसे दुखी नहीं देखना चाहते ।विष्णु भगवान भोले हां नारद , क्योंकि  प्राण छोड़ते समय यदि इसका ध्यान इसकी गाय में रहा कि मेरी गाय का क्या होगा ,कहीं मेरे मरने के पश्चात इसे कसाई तो नहीं ले जाएंगे। अगर यह इन सब बातों को सोचती हुई मृत्यु को प्राप्त हुई तो इस बुढ़िया मां को अगले जन्म में गाय का ही शरीर मिलेगा । इसलिए मैं नहीं चाहता कि बुढ़िया मां के साथ ऐसा हो । इसलिए बुढ़िया मां की मृत्यु से पहले मैंने इसकी गाय मरने के लिए कह दिया । मैं चाहता हूं कि यह बुढ़िया मां मृत्यु के बाद मेरे परम धाम को आए और इस बुढ़िया मां को मोक्ष की प्राप्ति हो । वही जो वह कंजूस सेठ था । उसे मैंने लक्ष्मी वृद्धि का आशीर्वाद इसीलिए दिया ताकि वह लक्ष्मी , धन संपदा के बढ़ने पर और लालची हो जाए और जिस तरह एक सांप अपने धन की रखवाली करता है उसी प्रकार जब यह सेठ मृत्यु को प्राप्त होगा तो वह भी उस धन दौलत के बारे में सोचेगा कि मेरे मरने के बाद इस धन दौलत का क्या होगा , मेरा परिवार इस धन दौलत को कैसे संभालेगा । तो मरते समय जब वह इस तरह के विचार अपने मन में लाएगा । तो उसे अगले जन्म में नाग योनि प्राप्त होगी ।  हे नारद मुनि मैं चाहता हूं कि मेरे भक्त लालच, अहंकार, क्रोध ,काम, मद इन सब से दूर रहे । बहुत से धर्मात्मा सेठ ऐसे भी हैं जिनके पास खूब धन दौलत है लेकिन उनमें जरा सा भी अहंकार नहीं और वह दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं ।अपनी धनसंपदा को गरीब और लाचार व्यक्तियों में बांटते हैं । और भूखे को भोजन कराते हैं ।वह भी मुझे बहुत ही प्रिय होते हैं । जो निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करते हैं ।वे लोग पृथ्वी पर सारे सुखों को भोग कर अंत में मेरे परमधाम को प्राप्त होते हैं ।


Once Narada Rishi was traveling the earth. Then he saw that most of the living beings on earth who are virtuous men, saints, do good to others. He is mostly sad. Seeing all this, his mind became restless. And for the solution of his doubts he went to Vishnu in Vaikuntha Loka. Going there, he bowed to Lord Vishnu and Mata Lakshmi ji. Seeing Narada, Lord Vishnu said - Come Narada. What's the matter, you look very worried. What is the reason for your worry? Narad Rishi said, Lord! I am just coming from a tour of the earth. I have seen that most of the living beings who follow you, who walk on the path of truth, why do they always get hurt? Lord Vishnu smiled on this and told Narad Rishi that come on Narada, today I also travel the earth with you. Then Lord Vishnu and Narad ji took the form of Brahmins and came to earth. Lord Vishnu said that Narada, I am feeling very hungry, let's go somewhere and have food. Then they went to a village. There was a Seth ji's house there. Seth ji was very rich. Lord Vishnu and Narad ji reached the door of Seth ji's house and started begging for food. Seth ji came out and saw two Brahmin people standing at his door. Seeing Seth ji coming, Narad ji said that O Seth ji, we have not eaten anything for 2 days. Feeling very hungry. Please give us food. Seth ji got angry and said that there is no food for people like you here. Don't know where they come from? As if some treasure is kept here. Seth ji drove those two brahmins away from there. Narad ji got very angry. He told Lord Vishnu that O Lord, you curse this Seth. This Seth is of a very angry nature and is also a miser. Then Lord Vishnu smiled and as soon as Lord Vishnu looked back, he saw Seth. So it came out from the mouth of Lord Vishnu that Go Seth ji, there should be a lot of growth of Lakshmi in your house. Hearing this, Naradji was surprised and said that O Lord, you had to curse him and you gave him the boon of increasing Lakshmi. Lord Vishnu smiled and said that let's go Narada from here, let's go somewhere else for food. I am feeling very hungry. Then both the brahmins while walking came near a hut. An old mother lived in that hut. Then both those brahmins went outside the hut and begged for food. Then the old mother said - I have nothing to eat, but I have an old cow. Whatever little milk it gives, I will give it to you guys. Please come and do it. The old lady gave seats to the two brahmins to sit on. Then the old mother brought out the cow's milk and gave some milk to Vishnu Bhagwan ji and Narad ji. Both of them quenched their hunger by drinking milk. Then both the brahmins left from there. Narad ji was getting very happy. He told Lord Vishnu that O Lord, this old mother is very good. They have fed us their cow's milk even though there is no food in their house. Please give him some boon. Then as soon as Lord Vishnu looked back and looked at the old lady, Lord Vishnu came out of the mouth that mother, this cow of yours should die. On hearing this word from the mouth of Vishnu ji, Narad ji was astonished and said that oh Lord, where you had to curse, you gave a boon and where you had to give a boon, you cursed. Then Lord Vishnu smiled and said. Narada said that this old lady is my great devotee. I don't want it to cause any pain. Narad ji said but God, when its cow dies, it will be very sad and you are saying that you do not want to see it sad. What will happen, after my death, it will not be taken to the butcher. If she died thinking all these things, then this old mother would get the body of a cow in her next birth. That's why I don't want this to happen to the old mother. Therefore, before the death of the old mother, I asked her cow to die. I want this old lady to come to my supreme abode after death and this old lady should attain salvation. That miserly Seth was the same. I blessed him with the growth of Lakshmi so that he becomes more greedy when Lakshmi increases wealth, and like a snake guards his wealth, in the same way when this Seth dies, he will also talk about that wealth. Will think that after my death what will happen to this wealth, how will my family handle this wealth. So while dying he will bring such thoughts in his mind. So he will get a snake yoni in the next birth. O Nārada Muni, I wish that my devotees should stay away from all these greed, ego, anger, lust and materialism. There are also many virtuous Seths who have a lot of wealth but there is no ego in them and they are always ready to help others. They distribute their wealth among poor and helpless people. And feed the hungry. They are also very dear to me. Those who serve the people selflessly. Those people, after enjoying all the pleasures on earth, finally reach my supreme abode.

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