पेट का ढक्कन। एक अनोखी कहानी | stomach cover. a unique story













 


एक बार भोले बाबा और मां पार्वती पृथ्वी पर घूमने के लिए निकले । जैसे ही भोले बाबा और मां पार्वती पृथ्वी पर पहुंचे तो भोले बाबा ने मां पार्वती से कहा – कि पार्वती ,तुम पृथ्वी लोक पर किसी भी मनुष्य की दुख तकलीफ को देखकर विचलित मत होना । क्योंकि जो भी कोई यहां सुख और दुख प्राप्त करता  हैं , वो सबको अपने कर्म अनुसार ही मिलता है । पार्वती मां ने हां कह दी और वे दोनों पृथ्वी पर घूमने लगे । घूमते – घूमते  एक गांव में पहुंचे । उस गांव में एक घर में उन्होंने देखा कि एक सास अपनी बहू को डांट रही है और कह रही है कि गरीब परिवार की हमारे घर में पता नहीं कहां से आ गई है ? हमारी किस्मत फूटी थी , जो हमने गरीब परिवार से नाता जोड़ लिया । ना तो दहेज में कुछ लाई और ना ही इसके मां और पिता कुछ सामान वगैरह देकर जाते हैं । त्यौहार पर कुछ भी सामान नहीं लाते । तब बहू बोली कि सासू मां ,मेरी मां बहुत बीमार है और उन्हीं की दवाइयों पर सारा पैसा खर्च हो जाता है । मेरे पिताजी जब तक मुझे दे सकते थे , तब तक उन्होंने मुझे दिया । और अब सारा धन दवाइयों पर और घर खर्च में चला जाता है । इसलिए मेरे पिताजी कुछ नहीं दे पाते । मेरी मां बहुत बीमार है और मेरे पिताजी आज मुझे लेने के लिए आ रहे हैं । आप अनुमति दें ,तो  क्या मैं अपने पिता के साथ चली जाऊं ? सास बोली – नहीं ,नहीं कहीं मत जाना , यहीं पर रहो । फिर घर का काम कौन करेगा ? थोड़ी ही देर में बहू के पिता वहां पर आ जाते हैं और हाथ जोड़कर कहते हैं कि समधन जी , मेरी बेटी को मेरे साथ भेज दीजिए ।

 बस एक दिन की बात है इसकी मां बहुत बीमार है और इसे देखना चाहती है । सास ने कहा – ठीक है एक दिन के लिए ले जाओ । लेकिन कल शाम को मैं अपने बेटे को भेजूंगी और इसे वापस भेज देना । दोनों पिता और बेटी चल दिए । वहां जाकर बेटी ने देखा कि उसकी मां बहुत बीमार है और उसका नाम बार-बार ले रही है । वह अपनी मां के पास जाती है और पूछती है कि मां कैसी हो ? उसकी मां बोली बेटी तुम आ गई । मैं कब से तुम से मिलना चाहती थी । अब तुम्हें देख लिया ,अब मैं चैन से मर सकूंगी । बेटी बोली नहीं मां , ऐसी बात मत करो ,अभी तो आपको और जीना है । भैया और भाभी कहां पर है ? तभी उसके भैया और भाभी आ जाते हैं । वह अपने भैया और भाभी के गले लगती है । शाम हो जाती है उसका भैया अपनी पत्नी से कहता है कि  मेरी बहन बहुत दिनों बाद मायके आई है , तुम उसके लिए कुछ अच्छा सा खाने को बना दो । तभी उसकी पत्नी कहती है कि घर में कुछ नहीं है , मैंने सिर्फ बाजरे की रोटी और चटनी बनाई है । पूरी ,पकवान के लिए घर में सामान नहीं है । तभी उसकी बहन वहां पर आ जाती है और कहती है कि भैया और भाभी ,आप कैसी बातें कर रहे हो । मैं अब भी इसी घर की बेटी हूं । अगर भाभी ने बाजरे की रोटी और चटनी बनाई है , तो मुझे वही बहुत पसंद है । मैं भाभी के हाथ की चटनी और बाजरे की रोटी को कब से तरस रही थी। आज जी भर के खाऊंगी । वह खाना खाती है और देखती है कि उसका पति उसे लेने आया है । उसका पिता कहता है ,  दामाद जी ! आप तो कल आने वाले थे ? फिर इस समय ? क्या बात है? सब ठीक है ना?  पति कहता हैं कि मां की तबीयत बहुत खराब है और उन्होंने आज ही हमे वापस बुलाया है । बेटी मन में सोचती है कि सासु मां तो ठीक थी , फिर अचानक क्या हुआ ? जो उन्होंने मुझे आज ही बुला लिया । लेकिन वह अपने पति से कुछ नहीं कहती और अपने पति के साथ अपनी ससुराल चली जाती है । वहां जाकर देखती है कि उसकी सास बैठ कर आराम से खाना खा रही है । बहू अपनी सास से कहती है मां जी क्या हुआ ? आप बीमार हो ? सास बोली – नहीं ,नहीं , मैंने तुम्हें ऐसे ही बुलाया था । घर का रात का काम कौन करता ?  इतने सारे बर्तन पड़े थे । बहू बेचारी बहुत परेशान हो जाती है और सोचती है कि मैं एक दिन भी अपने मां और भैया भाभी के साथ नहीं रह पाई । सास कहती है अच्छा यह तो बता , तेरे मायके में तेरे भैया और भाभी ने क्या खातिरदारी की तेरी ? बहु कहती है कि मेरी भाभी ने तो खीर ,पूरी ,कचोरी  और भी पता नहीं क्या-क्या पकवान बनाया था । पेट भर गया पर मन नहीं भरा था खाते-खाते । सास  मन में सोचती है कि देखो , कितना झूठ बोल रही है , गरीब घर की ,इसे कहां पूरी पकवान नसीब हुआ होगा ? कोई बात नहीं ,रात को सोने दो ,इसका पेट का ढक्कन उठाकर देखूंगी कि क्या-क्या खाया इसने । बहू यह कहकर  रसोई का काम करके सोने चली जाती है । रात को उसकी सास चुपके से उसके पेट का ढक्कन उठाकर खोलती है और देखती है कि उसमें तो बाजरे की रोटी और चटनी थी । जब बहू अगली सुबह उठती है तो सास कहती है – तुम तो बहुत झूठ बोलती हो , तुम तो कह रही थी कि पूरी और पकवान खाया था , लेकिन मैंने रात को तेरे पेट का ढक्कन खोल कर देखा , उसमे तो बाजरे की रोटी और चटनी थी । बहू की आंखों में आंसू आ जाते हैं और उसकी सास उसे बहुत फटकार लगाती है और बहुत ही जलील करती है ।  बहू रोती रोती भगवान के सामने जाती है और हाथ जोड़ कर कहती है कि हे भगवान , जैसे मेरे साथ हुआ ऐसा किसी के साथ मत करना । सबकी इज्जत तुम्हारे ही हाथ हैं । हे भोलेनाथ , मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि आज के बाद  किसी के भी पेट का यह ढक्कन ना खुले । ताकि कोई ना जान सके कि किस ने क्या खाया और क्या नही ? भगवान उसकी इस प्रार्थना को स्वीकार कर लेते हैं तब मां पार्वती कहती है कि हे भोलेनाथ , आप यह पेट का ढक्कन हमेशा के लिए बंद कर दो । ताकि भगवान के सिवा कोई भी इंसान ना जान पाए कि किसी का पेट भरा है या खाली है ।  कहते हैं कि उस दिन से भगवान शिव ने पेट का ढक्कन बंद कर दिया था । तब से पेट  का ढक्कन नहीं खुलता ।



stomach cover. a unique story

Once Bhole Baba and Mother Parvati went out to roam the earth. As soon as Bhole Baba and Mother Parvati reached the earth, Bhole Baba said to Mother Parvati – Parvati, do not be disturbed by seeing the suffering of any human being on the earth. Because whoever gets happiness and sorrow here, they all get it according to their karma. Parvati mother said yes and both of them started roaming the earth. While roaming around, he reached a village. In a house in that village, he saw that a mother-in-law is scolding her daughter-in-law and saying that where has the poor family come from in our house? Our luck was broken, which we linked with the poor family. Neither did he bring anything in dowry, nor does his mother and father go by giving some things etc. Do not bring anything to the festival. Then the daughter-in-law said that mother-in-law, my mother is very ill and all the money is spent on her medicines. As long as my father could give it to me, he gave it to me. And now all the money goes on medicines and household expenses. That's why my father can't give anything. My mother is very ill and my father is coming to pick me up today. If you allow, shall I go with my father? Mother-in-law said - No, no, don't go anywhere, stay here. Then who will do the housework? In no time, the daughter-in-law's father comes there and says with folded hands that Samadhan ji, send my daughter with me.

 It is only a matter of one day that his mother is very ill and wants to see him. Mother-in-law said - OK, take it for a day. But tomorrow evening I will send my son and send it back. Both father and daughter left. Going there, the daughter saw that her mother was very ill and was taking her name again and again. She goes to her mother and asks how is mother? His mother said daughter you have come. Since when have I wanted to meet you? Now I have seen you, now I will be able to die in peace. Daughter did not say mother, don't talk like this, now you have to live more. Where are brother and sister in law? Then his brother and sister-in-law arrive. She hugs her brother and sister-in-law. It is evening, his brother tells his wife that my sister has come to the maternal house after a long time, you should cook some good food for her. Then his wife says that there is nothing in the house, I have only made bajra roti and chutney. Poori, there is no material in the house for the dish. Then his sister comes there and says that brother and sister-in-law, what are you talking about. I am still the daughter of this house. If sister-in-law has made bajra roti and chutney, then I like that very much. Since when I was craving for sister-in-law's hand chutney and millet roti. I will eat my whole life today. She eats the food and sees that her husband has come to pick it up. His father says, son-in-law! You were going to come tomorrow? Then at this time? Whats up? everything is fine isn't it? Husband says that mother's health is very bad and she has called us back today itself. Daughter thinks in her mind that mother-in-law was fine, then what happened suddenly? Which he called me today. But she does not say anything to her husband and goes to her in-laws' house with her husband. Going there she sees that her mother-in-law is sitting and eating comfortably. The daughter-in-law tells her mother-in-law what happened mother? Are you sick ? Mother-in-law said - No, no, I had called you like this. Who does the housework at night? There were so many utensils. The poor daughter-in-law gets very upset and thinks that I could not live with my mother and brother-in-law even for a day. Mother-in-law says, well tell me, what did your brother and sister-in-law take care of you in your maternal house? The daughter-in-law says that my sister-in-law had made kheer, puri, kachori and what other dish she did not know. The stomach was full but the mind was not full. Mother-in-law thinks in her mind that look, how much she is lying, of poor house, where would she have got the whole dish? Never mind, let him sleep at night, I will lift the lid of his stomach and see what he ate. Saying this the daughter-in-law goes to sleep after doing the kitchen work. At night, her mother-in-law secretly lifts the lid of her stomach and opens it and sees that there was bajra roti and chutney in it. When the daughter-in-law wakes up the next morning, the mother-in-law says - you lie a lot, you were saying that you had eaten a whole other dish, but I opened the lid of your stomach at night and saw, it had millet roti and chutney. . The daughter-in-law gets tears in her eyes and her mother-in-law reprimands her a lot and humiliates her a lot. The daughter-in-law, crying, goes in front of God and says with folded hands that Oh Lord, don't do this to anyone like it happened to me. Everyone's respect is in your hands. O Bholenath, I request you with folded hands that after today this lid of anyone's stomach should not be opened. So that no one can know who ate what and what did not? When God accepts his prayer, then Mother Parvati says that O Bholenath, you should close the lid of this stomach forever. So that no human being except God can know whether someone's stomach is full or empty. It is said that from that day onwards Lord Shiva had closed the lid of the stomach. Since then the lid of the stomach does not open.

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