Gyan Ganga |स्वयं भगवान ने लिया अपने भग्त का बदला | hindi story


















एक संत भगवान नाम की मस्ती में पैदल चल रहे थे । जुबां पर हरि नाम का कीर्तन था । इस मस्ती में भगवान का नाम लेते हुए झूम-झूम के चल रहे थे । तभी उनकी नजर रास्ते में एक हलवाई की दुकान पर पड़ी । हलवाई जलेबी बना रहा था और साथ में दूसरी ओर दूध की रबड़ी बनाई जा रही थी । संत जी कुछ क्षण के लिए वहां पर रुक गए । शायद उन्हें भूख लगी थी। वे जलेबी खाना चाह रहे थे । परंतु उनके पास तो पैसे ही नहीं थे , तो वे कैसे हलवाई से जलेबी मांगते । वे वहां से चलने लगे कि तभी हलवाई ने उन्हे रोका और शायद परमात्मा की प्रेरणा से हलवाई ने उन्हे गरमा गर्म कुछ जलेबी और रबड़ी खाने को दी । संत ने जलेबी और रबड़ी खाई । फिर संत ने आसमान की ओर हाथ उठाकर परमात्मा का धन्यवाद किया और उस हलवाई को आशीर्वाद देते हुए आगे चल दिए । संत जी हरि कीर्तन में मस्त होकर चल रहे थे । जैसे कि उन्हें दुनिया वालों की कोई खबर ही नहीं हो । वे मौज मस्ती में और सड़क पर पड़े हुए बारिश के पानी में छींटे उड़ाते हुए चल रहे थे । उनके पीछे – पीछे एक प्रेमी युगल जोड़ा बारिश के पानी से बचता बचाता चल रहा था । संत जी को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था । जैसे ही संत ने दोबारा पानी में पैर मारा , तब कुछ छींटे उस प्रेमी युगल जोड़े की प्रेमिका के कपड़ों पर लग गए। प्रेमी को यह देखते ही बहुत गुस्सा आ गया । और उसने संत के मुंह पर एक जोरदार थप्पड़ मारा । उसने संत जी के कपड़ों को पकड़कर कहा कि –तुम अंधे हो , तुम्हे दिखाई नहीं देता , जो तुमने इस कीचड़ के छींटे मेरी प्रेमिका के कपड़ों पर मार दिए है । उसके सारे कपड़े गंदे हो गए हैं । अब इसकी भरपाई कौन करेगा । प्रेमी गुस्से से बहुत ही लाल हो गया था । लेकिन संत जी चुपचाप थे । उन्होंने उस युवक से कुछ भी नहीं कहा । आसपास के आते जाते लोग भी इस तमाशे को बड़े ही शौक से देख रहे थे । किसी ने भी उन संत को छुड़ाने की कोशिश नहीं की । बाद में उस युवक ने संत जी को धक्का दे दिया और उन्हे कीचड़ में गिरा दिया । वो वहां से हंसता हुआ अपनी प्रेमिका के साथ चल दिया । तब संत जी ने आसमान की तरफ सिर उठाकर कहा कि – " वाह मेरे भगवन , कभी तो गरम गरम जलेबी रबड़ी खिलाता है और कभी गरम थप्पड़ " । ठीक है , जैसी तेरी मर्जी , तू जो चाहे उसी में मैं भी खुश हूं । और फिर वे दोबारा उठकर वापस अपने रास्ते पर चलने लगते है । दूसरी ओर प्रेमी और प्रेमिका थोड़ी आगे ही चलते है कि तभी वह युवक ठोकर खाकर बहुत जोर से गिरता है। उसकी प्रेमिका बहुत जोर से चिल्लाती है । आसपास के सब लोग इकट्ठा हो जाते हैं । वह उसे उठाने की कोशिश करती हैं । लेकिन उसका प्रेमी उठ ही नही रहा था । उसके सिर से खून निकल रहा था । वहां खड़े लोगों को समझ ही नहीं आ रहा था कि किसी के अचानक ठोकर खाकर गिरने से इतना खून कैसे निकल सकता है । तभी कुछ लोग दूर से संत जी को आते हुए देखते हैं और सोचते हैं कि शायद संत जी ने इसे श्राप दिया है। जिसके कारण इसकी ये हालत हो गई हैं । सब लोग संत जी को घेर लेते हैं और कहते हैं कि आप कैसे साधु संत हैं , कैसे भक्त हैं आप , जो इस युवक के नाराज होने पर आप ने इसको मर जाने का श्राप दे दिया । तब संत जी बोले कि – नहीं , मैंने इसे श्राप नहीं दिया । लेकिन किसी को उनकी बात पर यकीन नहीं आया । तब संत जी ने लोगों से पूछा कि क्या आप मे से कोई ऐसा गवाह है जिसने वो पूरी घटना देखी थी। तो एक आदमी बोला कि – हां , मैं गवाह हूं, मैंने आप दोनों का झगड़ा अपनी आंखों से देखा था । तब संत जी बोले कि – क्या मैंने इस युवक के कपड़ों को अपने कीचड़ से गंदा किया था ? वो आदमी बोला कि– नही , आपसे तो उसकी प्रेमिका के कपड़ों पर कीचड़ लग गया था । तब संत जी बोले – फिर उसके प्रेमी ने मुझे थप्पड़ क्यों मारा ? वह क्यों नाराज हो गया ? तब वो आदमी बोला कि – उसका गुस्से में आना स्वभाविक ही था , क्योंकि वह उसका प्रेमी था । वह कैसे अपनी प्रेमिका के कपड़ों को गंदा होते देख सकता था । तब संत जी ने जोर से ठहाका लगाकर कहा कि – "जब इसका प्रेमी इसके कपड़ों पर लगे दाग को बर्दाश्त नहीं कर पाया , तो मेरा साथी , मेरा प्रेमी और जो मेरा यार है वह परमात्मा मुझे लगे थप्पड़ को कैसे बर्दाश्त कर सकता था ।" ईश्वर ही मेरा यार है जो मुझ से प्रेम करता है । उसकी लाठी से सब राजा महाराजा डरते हैं । यह कहते हुए वह संत जी बोले कि – जाओ , इसे जल्दी से अस्पताल में ले जाओ । मैं अपने उस परमात्मा से दुआ करूंगा कि यह बच जाए और इसे क्षमा करें । यह कहते हुए संत जी वहां से चले जाते हैं ।
तो भक्तो , इस कथा से हमें यही सीख मिलती है कि परमात्मा की लाठी में आवाज नहीं होती । हमें कभी भी किसी सच्चे भक्त और सच्चे साधु संत का अपमान नहीं करना चाहिए । क्योंकि परमात्मा एक बार अपने किए हुए अपमान को बर्दाश्त कर सकते हैं , परंतु अपने भक्तों के अपमान को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकते ।


A saint named God was walking in fun. The name of Hari was chanted on the tongue. Taking the name of God in this fun, they were walking with a bang. That's why his eyes fell on a confectionery shop on the way. The confectioner was making jalebi and at the same time milk rabri was being made on the other side. Saint ji stopped there for a few moments. Maybe he was hungry. They wanted to eat jalebi. But he had no money, so how could he ask for jalebis from the confectioner. They started walking from there when the confectioner stopped them and perhaps with the inspiration of God, the confectioner gave them some hot jalebi and rabdi to eat. The saint ate jalebi and rabdi. Then the saint thanked God by raising his hands towards the sky and went ahead blessing that confectioner. Saint ji was walking engrossed in Hari Kirtan. As if they don't have any news about the people of the world. They were walking merrily and splashing in the rain water lying on the road. A loving couple was walking behind them, saving themselves from the rainwater. Saint ji did not know anything about this. As soon as the saint stepped into the water again, some splashes fell on the clothes of the couple's girlfriend. The lover got very angry on seeing this. And he slapped the saint hard on the face. Holding the saint's clothes, he said - You are blind, you cannot see that you have splashed this mud on my girlfriend's clothes. All his clothes have become dirty. Now who will compensate for this? The lover had become very red with anger. But the saint was silent. He didn't say anything to that young man. People coming and going around were also watching this spectacle with great interest. No one tried to rescue that saint. Later that young man pushed the saint and made him fall in the mud. He left there laughing with his girlfriend. Then the saint raised his head towards the sky and said - "Wow my God, sometimes he feeds hot jalebi rabri and sometimes hot slap". Okay, as you wish, I am also happy in whatever you want. And then they get up again and start walking back on their way. On the other hand, the lover and the beloved walk a little ahead, that's why the young man stumbles and falls down very hard. His girlfriend screams very loudly. Everyone around gathers. She tries to wake him up. But her lover was not getting up. Blood was coming out of his head. The people standing there could not understand that how can so much blood come out when someone suddenly stumbles and falls. Only then some people see Sant ji coming from a distance and think that maybe Sant ji has cursed it. Because of which it has become like this. Everyone surrounds the saint and says what kind of saint you are, what kind of devotee you are, that when this young man got angry, you cursed him to die. Then the saint said - No, I did not curse him. But no one believed his words. Then the saint asked the people whether there was any such witness among you who had seen the whole incident. So a man said – Yes, I am a witness, I had seen the quarrel between you two with my own eyes. Then the saint said - did I dirty the clothes of this young man with my mud? The man said - No, you had got mud on his girlfriend's clothes. Then the saint said - then why did her lover slap me? Why did he get angry? Then the man said that it was natural for him to get angry because he was her lover. How could he see his girlfriend's clothes getting dirty. Then the saint laughed loudly and said - "When his lover could not tolerate the stain on his clothes, then how could God, my companion, my lover and my friend, tolerate the slap on me." God is my friend who loves me. All the kings and emperors are afraid of his stick. Saying this, the saint said - Go, take him to the hospital quickly. I will pray to my God that he is saved and forgives him. Saying this, the saint leaves from there.
So devotees, we learn from this story that there is no sound in the stick of God. We should never insult any true devotee and true saint. Because God can tolerate the insult done to him once, but cannot tolerate the insult of his devotees at all.

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